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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:55 · नई दिल्ली संस्करण

कोरोना से मौत पर मुआवजे में जवाब के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा समय, अदालत ने 10 दिन दिए

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

केंद्र सरकार ने कोरोना से हुई मौत पर चार लाख रुपये मुआवजा दिए जाने और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की नीति पर जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दस दिन का समय मांग लिया है।नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने कोरोना से हुई मौत पर चार लाख रुपये मुआवजा दिए जाने और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की नीति पर जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दस दिन का समय मांग लिया है। कोर्ट मामले पर 21 जून को फिर सुनवाई करेगा।

शुक्रवार को जस्टिस अशोक भूषण व एमआर शाह की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस याचिका को विरोध में नहीं ले रही है। मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार चल रहा है। जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया जाए।

तभी पीठ के न्यायाधीश ने कहा कि कुछ राज्यों ने इसे लागू भी किया है। उन्होंने खबरों में पढ़ा है कि बिहार ने चार लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है। लेकिन ज्यादातर राज्यों ने अपनी नीति तय नहीं की है। इस पर मेहता ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।

पीठ ने जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र की ओर से दो सप्ताह का समय मांगे जाने पर कहा कि उन्होंने पहले नोटिस जारी किया था। इतना समय क्यों चाहिए। मेहता ने कहा कि अन्य चीजों में व्यस्तता के कारण समय लग गया। लेकिन पीठ ने कहा कि दो सप्ताह नहीं 10 दिन में जवाब दाखिल करिये।

कोर्ट ने मामले को 21 जून को फिर सुनवाई पर लगाने का निर्देश देते हुए सरकार से कहा कि वह दाखिल किये जाने वाले हलफनामे की प्रति दो दिन पहले शनिवार को ही याचिकाकर्ताओ को दे देगी । इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत का कारण न दिए जाने के कारण भी दिक्कत आती है।

इस पर मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार चल रहा है। वकील ने ब्लैक फंगस को भी कोरोना का परिणाम कहा। इस पर पीठ ने कहा कि जब सरकार कह रही है कि वह मामले पर विचार कर रही है तो सरकार का जवाब आने दीजिए।

सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लंबित हैं एक वकील गौरव कुमार बंसल की है और दूसरी वकील रीपक कंसल ने दाखिल की है जिनमें कोरोना से मरने वालों के परिजनों को चार लाख रुपये मुआवजा या अनुग्रह राशि दिये जाने की मांग की गई है।

साथ ही कोरोना से मरने वालों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के बारे मे कोई समान नीति न होने के कारण आने वाली दिक्कतों का मुद्दा उठाते हुए प्रमाणपत्र या दस्तावेज जारी करने की भी मांग की गई है।

गत 24 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या कोरोना से मरने वालों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के बारे में कोई समान नीति है। कोर्ट ने कहा था कि इस बारे में समान नीति होनी चाहिए। अगर कोई समान नीति नहीं होगी तो पीडि़त परिजन किसी भी योजना के लाभ का दावा नहीं कर पाएंगे।

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