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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:54 · नई दिल्ली संस्करण

300 फीसदी बढ़ी केंद्र की कमाई, असम की गृहिणियां रसोई गैस छोड़ जलाने लगीं लकड़ी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल से मिलने वाला कर सरकारों की कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है। कोरोना के चलते आर्थिक मंदी के दौर में इसने खजाने को बड़ा संबल दिया है। हालांकि महंगे ईंधन से जनता को फटका पड़ रहा है।

महंगे पेट्रोल-डीजल से आम आदमी त्रस्त है, लेकिन केंद्र सरकार का कर संग्रह पिछले छह साल में 300 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। सरकार ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उधर चुनावी राज्य असम के जोरहाट जिले से खबर है कि रसोई गैस महंगी होने से वहां की महिला श्रमिकों ने लकड़ी जलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने राजनीतिक दलों से मजदूरी बढ़ाने की मांग की है, ताकि वे महंगी रसोई गैस खरीद सकें।

केंद्र को 10 माह में 2.94 लाख करोड़ मिले

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार ने मोदी सरकार के आने के पहले साल में 2014-15 के दौरान पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क से 29,279 करोड़ रुपये और डीजल पर उत्पाद शुल्क से 42,881 करोड़ रुपये अर्जित किए थे। मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 10 महीने के दौरान पेट्रोल और डीजल पर कर संग्रह बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया।

जोरहाट के चाय बागान श्रमिकों का कहना है कि उन्हें मजदूरी कम मिलती है, इसलिए वे महंगा रसोई गैस सिलिंडर नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना है कि वे बीते करीब एक साल से एलपीजी सिलिंडर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए लकड़ी जलाकर खाना पकाने लगे हैं। अब तो सबसिडी भी नहीं मिल रही है।

बड़े-बड़े वादे करते हैं दल

चाय बागान में काम करने वाली महिला श्रमिकों का कहना है कि राजनीतिक दल बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं करते। उनका कहना है कि रसोई गैस के दाम कम नहीं कर सकते तो कम से कम हमारी मजदूरी ही बढ़ा दीजिए। जो भी पार्टी सत्ता में आए वह हमारी मजदूरी ही बढ़ा दे। इससे हमें भरण-पोषण में मदद मिलेगी।

मात्र 173 रुपये मिलती है मजदूरी

कुछ बागानों की महिला श्रमिकों ने बताया कि उन्हें मात्र 173 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। इतनी कम मजदूरी में महंगा सिलिंडर कैसे खरीद सकते हैं। पहले जब सस्ता था तो हम गैस स्टोव का उपयोग करते थे, लेकिन जब से यह महंगा हुआ है, हमने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है। लकड़ी का चूल्हा फूंकने में बहुत परेशानी होती है।

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