तीस दिनों के भीतर बीएसए कोई जवाब नहीं देते तो नियुक्ति अनुमोदित मानी जाएगी : हाईकोर्ट
प्रयागराज, । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक प्रधानाध्यापिका की नियुक्ति के
मामले की जांच करते हुए माना है कि यदि बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को
अनुमोदन के लिए भेजे गए दस्तावेज उनके द्वारा 30 दिनों की अवधि के भीतर
अनुमोदित नहीं किया जाता है, तो यूपी मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियम,
1978 के नियम 10 के अनुसार, उन्हें अनुमोदित माना जाएगा।
न्यायमूर्ति
पीयूष अग्रवाल ने कहा, इस बात पर विवाद नहीं है कि दस्तावेज मंजूरी के लिए
भेजे गए थे और 30 दिन बीत जाने के बाद भी यदि कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई
तो नियम 1978 के नियम 10(5)(पपप) के अनुसार यह माना जाएगा कि मंजूरी दे दी
गई है ।
मामले के अनुसार याची कविता सिंह को जिला बेसिक शिक्षा
अधिकारी द्वारा 17 अक्टूबर 1995 के आदेश द्वारा डॉ. अंबेडकर जूनियर हाई
स्कूल, कौशाम्बी में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने
उक्त पद पर 19 वर्षों तक काम किया। 2016 में राम कली बालिका पूर्व
माध्यमिक विद्यालय करछना इलाहाबाद ने कई पदों के लिए रिक्तियों का विज्ञापन
दिया, जिनमें से एक प्रधानाध्यापक का पद भी था। याची ने अपेक्षित मानदंडों
को पूरा करते हुए इसके लिए आवेदन किया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
ने पत्रांक 28 जुलाई 2016 द्वारा विभागीय प्रतिनिधियों को नामित किया तथा
चयन प्रक्रिया पूर्ण की गई। याचिकाकर्ता सहित तीन अभ्यर्थियों को
प्रधानाचार्य पद के लिए चयनित किया गया। 02 जून 2017 को प्रबंधन ने अनुमोदन
प्रदान करने के लिए पत्र भेजा। एक माह बीत जाने के बावजूद मामला लम्बित
रहा।
याची को 18 जुलाई 17 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया, जिसमें
उसे 15 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया। याचिकाकर्ता ने 25
जुलाई 2017 को प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया और तदनुसार अपने
कर्तव्यों का निर्वहन किया। हालांकि, वेतन न मिलने पर उसने इसके खिलाफ रिट
याचिका दायर की। जिसमें याचिकाकर्ता को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के
समक्ष अपनी शिकायतें व्यक्त करने के लिए एक अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया
गया। बीएसए ने अनुमोदन रिकॉर्ड में न होने के आधार पर याचिकाकर्ता को
अयोग्य घोषित करने का आदेश पारित किया गया। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता
ने हाईकोर्ट के समक्ष वर्तमान रिट याचिका दायर की।
याची के वकील ने
दलील दी कि याचिकाकर्ता ने 19 साल के अनुभव प्रमाण पत्र के साथ सभी आवश्यक
दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। जिसमें दिखाया गया था कि वह संस्था में सहायक
शिक्षिका के रूप में काम करती थी। यह प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता के
अनुभव प्रमाण पत्र में वर्तमान प्रबंधक, आकाश सिंह द्वारा छेड़छाड़ की गई थी,
जिसके आधार पर विवादित आदेश पारित किया गया था। प्रस्तुत किया गया कि
याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर थे, सिवाय
अनुभव प्रमाणपत्र के जो उनके द्वारा नहीं दिया गया था।
इसके विपरीत,
राज्य के वकील ने तर्क दिया कि नियुक्ति को इस आधार पर खारिज कर दिया गया
कि कोई अनुमोदन नहीं था जो याचिकाकर्ता की प्रिंसिपल के पद पर उक्त
नियुक्ति को स्थापित करता हो। इसके अलावा, यह प्रस्तुत किया गया कि
याचिकाकर्ता का अनुभव प्रमाण पत्र गलत पाया गया और इस प्रकार याचिकाकर्ता
के दावे को एक सही आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा
कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाईस्कूल) (शिक्षकों
की भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियमावली, 1978 के नियम 10 के अनुसार, बीएसए को
या तो 30 दिन की अवधि के भीतर अनुमोदन प्रदान करने के लिए उचित आदेश पारित
करना था, या यदि कोई त्रुटि हो तो उसे दूर करने के लिए कागजात वापस करना
था, जो वर्तमान मामले में बीएसए करने में विफल रहा।
इसके अलावा,
न्यायालय ने माना कि चूंकि यह विवादित नहीं था कि दस्तावेज अनुमोदन के लिए
भेजे गए थे, इसलिए 30 दिनों की अवधि बीत जाने के बाद भी यदि कोई पत्र
प्राप्त नहीं हुआ, तो नियम 1978 के नियम 10 (5) (पपप) के अनुसार यह माना
जाएगा कि अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है।
न्यायालय ने सतेन्द्र मणि
दुबे बनाम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बस्ती एवं 3 अन्य में इलाहाबाद उच्च
न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें यह कहा गया था कि अनुमोदन के लिए
दस्तावेज प्रस्तुत करने की तिथि से 30 दिन की अवधि बीत जाने के बाद अनुमोदन
हुआ माना जाएगा। तदनुसार, रिट याचिका स्वीकार कर ली गई।
अदालत ने
प्रतिवादियों को एक महीने के भीतर अनुभव प्रमाण पत्र सत्यापित करने का
निर्देश दिया। यह माना गया कि यदि दस्तावेज़ वास्तविक पाया जाता है, तो
याचिकाकर्ता को प्रिंसिपल के पद पर बने रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस
शर्त पर, न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसके वेतन का
बकाया भुगतान किया जाएगा और उसे उसका मासिक वेतन भी मिलता रहेगा।





