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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:14 · नई दिल्ली संस्करण

'दिमागी नक्सल' बयान पर भाजपा का कांग्रेस पर वार, पी. चिदंबरम को घेरा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
'दिमागी नक्सल' बयान पर भाजपा का कांग्रेस पर वार, पी. चिदंबरम को घेरा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में दिए गए 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर तीखा हमला बोला है। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के 24 घंटे के भीतर ही पी. चिदंबरम ने कथित तौर पर "मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है" कहकर अपनी सोच जाहिर कर दी।सोमवार को सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और ऐसे समय में प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के सामने 'दिमागी नक्सल' जैसी विचारधारा के खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया। लेकिन पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि ऐसी मानसिकता रखने वाले लोग स्वयं सामने आ रहे हैं।उन्होंने कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 13 अप्रैल, 2006 का बयान भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "नक्सलवाद का खतरा भारत के इतिहास में आज तक आंतरिक सुरक्षा के लिए उत्पन्न सबसे बड़ा खतरा है।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के ही प्रधानमंत्री नक्सलवाद को सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा खतरा मानते थे, तब आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस तरह का बयान क्यों दे रहे हैं।भाजपा ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान देश में तथाकथित 'रेड कॉरिडोर' का विस्तार हुआ और 180 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित हो गए।सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पी. चिदंबरम के गृहमंत्री रहने के दौरान 5,000 से अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, 1,913 सुरक्षा बलों के जवान नक्सली हिंसा में शहीद हुए और नक्सलियों के पास मौजूद 92 प्रतिशत से अधिक हथियार पुलिस से लूटे गए थे।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी गई। इन क्षेत्रों में अब 1,800 से अधिक बैंक शाखाएं, 1,200 से ज्यादा एटीएम और 6,000 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे लोगों को बैंकिंग, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, 22 लाख से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला है।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सुधांशु ने आरोप लगाया कि जो लोग इन विकास कार्यों और वहां के सकारात्मक बदलाव को पसंद नहीं करते, वही 'दिमागी नक्सल' की सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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