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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:32 · नई दिल्ली संस्करण

भाजपा का दावा- वैश्विक स्तर पर सबसे कम बढ़े भारत में तेल के दाम, कांग्रेस पर साधा निशाना

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन
भाजपा का दावा- वैश्विक स्तर पर सबसे कम बढ़े भारत में तेल के दाम, कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली। भारत में तेल-गैस की कीमतों में इजाफा होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने फैसले का बचाव किया है। भाजपा नेताओं ने भारत और अन्य देशों में तेल कीमतों में बढ़ोतरी की तुलना की। साथ ही, दावा किया कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा। इस दौरान, उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को हर चीज का राजनीतिकरण करने पर शर्म आनी चाहिए।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इसका असर दुनिया की लगभग हर अर्थव्यवस्था में सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई दिया।

लेकिन भारत इस पूरी तस्वीर में एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा है।"

उन्होंने बताया कि 23 फरवरी से 15 मई के बीच अधिकांश देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। अमित मालवीय के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 44.5 प्रतिशत बढ़ीं और डीजल की कीमतों में 48.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 54.9 प्रतिशत और डीजल के दाम 44.9 प्रतिशत बढ़े हैं। ब्रिटेन में पेट्रोल की कीमत में 19.2 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 34.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

अमित मालवीय ने बताया कि जर्मनी में पेट्रोल के दाम 13.7 प्रतिशत और डीजल के दाम 19.8 प्रतिशत बढ़े, जबकि जापान में पेट्रोल की कीमत 9.7 प्रतिशत और डीजल 11.2 प्रतिशत बढ़ी।

भाजपा नेता ने यह भी बताया कि म्यांमार में पेट्रोल की कीमत में सबसे अधिक 89.7 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 112.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

इन देशों के मुकाबले भारत की बात करते हुए भाजपा नेता ने कहा, "भारत में वृद्धि सबसे कम रही, जहां पेट्रोल की कीमत में 3.2 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने पोस्ट में लिखा, "केवल सऊदी अरब में कोई वृद्धि नहीं हुई, क्योंकि वहां प्रत्यक्ष सरकारी सब्सिडी व्यवस्था लागू है। लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा। यह अपने आप नहीं हुआ।"

उन्होंने कुछ रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, "पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद पूरे 76 दिनों तक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, जिनकी खुदरा बाजार में लगभग 90% हिस्सेदारी है, ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे जनता पर नहीं डाला।

उन्होंने स्वयं लागत का बड़ा हिस्सा वहन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिदिन लगभग ₹1000 करोड़ तक की अंडर-रिकवरी हो रही थी।"

भाजपा नेता ने कहा कि 15 मई को घोषित 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि लगभग चार वर्षों में पहली बढ़ोतरी है और यह करीब 95 रुपए प्रति लीटर के आधार मूल्य पर सिर्फ लगभग 3.5 प्रतिशत की वृद्धि बैठती है। बाकी दुनिया से तुलना कीजिए। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में लोग तीन महीने पहले की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक कीमत चुका रहे हैं, जबकि मलेशिया में 56 प्रतिशत और अमेरिका में लगभग 45 प्रतिशत अधिक कीमत चुका रहे हैं। कई देशों में डीजल की कीमतें 50 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, क्योंकि डीजल सीधे माल ढुलाई, व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा है।

इसके साथ ही अमित मालवीय ने कहा कि भारत ने इसके विपरीत, दो महीने से अधिक समय तक वैश्विक तेल संकट का असर आम नागरिकों तक पहुंचने से रोके रखा और फिर भी केवल सीमित व संतुलित वृद्धि की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पेट्रोल पंप की कीमतों का मामला नहीं है। ईंधन की कीमतें परिवहन, खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और आम परिवारों के बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। ईंधन मूल्य नियंत्रण का अर्थ है महंगाई पर नियंत्रण।

भाजपा नेता ने कहा कि कहानी सिर्फ 3 रुपए बढ़ने की नहीं है। असल कहानी यह है कि जब दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल-डीजल 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और कहीं-कहीं 90 प्रतिशत तक महंगे हो गए, तब भारत ने वृद्धि को केवल लगभग 3 प्रतिशत तक सीमित रखा। यही इस पूरे आंकड़े का वास्तविक संदर्भ है।

वहीं, भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने तेल की कीमतों को लेकर कांग्रेस के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "कांग्रेस पार्टी को हर चीज का राजनीतिकरण करने पर शर्म आनी चाहिए। कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो किसी भी वैश्विक संकट में हमेशा राजनीतिक अवसर तलाशती है और अंत में उसे मुंह की खानी पड़ती है।

प्रदीप भंडारी ने कहा, "होर्मुज स्ट्रेट संकट के बाद ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने और दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक कीमतें स्थिर रहने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

भाजपा प्रवक्ता ने पोस्ट में लिखा, "यह आर्थिक राष्ट्रभक्ति का समय है। 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं और कांग्रेस अपनी हताश राजनीति के कारण एक बार फिर बेनकाब हो रही है।"

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