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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:38 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार: बीएसएससी अध्यक्ष आलोक राज के इस्तीफे पर बवाल, राजद ने कहा- सरकार स्थिति स्पष्ट करे

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिहार: बीएसएससी अध्यक्ष आलोक राज के इस्तीफे पर बवाल, राजद ने कहा- सरकार स्थिति स्पष्ट करे

पटना। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के अध्यक्ष आलोक राज का पदभार संभालने के छह दिन बाद इस्तीफा देने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। विपक्ष इस इस्तीफे को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। साथ ही, सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की बात कर रहा है।

दरअसल, आलोक राज ने 31 दिसंबर, 2025 को अध्यक्ष का पदभार संभालने के महज छह दिन बाद अचानक इस्तीफा दे दिया। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने गुरुवार को कहा कि बीएसएससी के अध्यक्ष पद से छह दिनों के अंदर आलोक राज का इस्तीफा दिए जाने को हल्के में नहीं लिया जा सकता। बिहार में अभी कई विभागों में बहाली की प्रक्रिया चल रही है और इस बीच आलोक राज का इस्तीफा दिया जाना कई सवाल उठाता है।

राजद नेता ने कहा कि आलोक राज ने इस्तीफे का कारण भले ही व्यक्तिगत बताया हो, लेकिन अगर ऐसा होता तो वे पदभार ही ग्रहण नहीं करते। पदभार ग्रहण करने के मात्र पांच-छह दिनों में इस्तीफा देना सवाल जरूर खड़ा करता है।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह व्यवस्था पर सवाल है क्योंकि जिस ढंग से बिहार के एनडीए शासनकाल में बदनामी होती रही है, अधिकांश परीक्षाएं सवाल के घेरे में आई हैं। कहीं प्रश्नपत्र लीक हुआ तो कहीं सेंटर मैनेज करने के आरोप लगे। ऐसी एजेंसियों से भी परीक्षा संचालित कराई गई है जो दूसरे राज्यों में ब्लैक लिस्टेड हैं या जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि कई ऐसे सवाल हैं जो यहां के बच्चों के भविष्य से जुड़े हुए हैं। बिहार सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि आलोक राज के इस्तीफे को लेकर बिहार सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आज जो सवाल बिहार के बच्चों के सामने हैं, उसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

बता दें कि छात्र नेता दिलीप कुमार ने भी आलोक राज के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनका इस्तीफा भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के साथ समझौता करने से उनके इनकार को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व अध्यक्ष ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पद छोड़ दिया, क्योंकि उन पर कथित तौर पर गलत और अनैतिक निर्णय लेने का दबाव डाला जा रहा था।

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