नए संसद भवन का 10 दिसंबर को होगा भूमि पूजन, स्पीकर ओम बिरला ने पीएम मोदी को दिया निमंत्रण
21 महीने में बनकर तैयार होगा 'नया संसद भवन'
सभी मंत्री एक ही इमारत में बैठा करेंगे
नई दिल्ली: नए संसद भवन के निर्माण के लिए 10 दिसंबर को भूमि पूजन किया जाएगा. लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर पहुंचकर उन्हें भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने के लिए आमंत्रित किया.
प्राप्त जानकारी के मुतबिक नया संसद भवन 21 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा. नये संसद भवन का निर्माण कार्य दिसंबर में ही शुरू होगा और इसके अक्टूबर 2022 तक पूरा हो जाने की संभावना है.नये संसद भवन के निर्माण की अवधि के दौरान मौजूदा संसद भवन में ही संसद सत्र को निर्बाध रूप से कराने के लिये आवश्यक उपाय किये गये हैं.
देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर संसद का सत्र नए भवन में ही आयोजित होगा. नये संसद भवन में लोकसभा कक्ष में 888 सदस्यों के, जबकि राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी. दोनों सदनों में भविष्य में सदस्यों की संख्या बढ़ने को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा रहा है.
नए भवन में संसद सदस्यों के लिए अलग-अलग कार्यालय होंगे. इसके साथ सांसदों के लिए लाउंज, लाइब्रेरी, समिति कक्ष और भोजन कक्ष भी होंगे. सांसदों के लिए डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो संसद को पेपरलेस बनाने की दिशा में अग्रणी कदम साबित होंगी.
नए संसद भवन में सभी मंत्री एक जगह बैठेंगे और आने-जाने में लगने वाले समय व किराए में भी बचत होगी. लोकसभा और राज्यसभा कक्षों के अलावा नए भवन में एक भव्य संविधान कक्ष होगा जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत दर्शाने के लिए अन्य वस्तुओं के साथ-साथ संविधान की मूल प्रति, डिजिटल डिस्प्ले आदि होंगे. भारत यात्रा पर आने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को इस हॉल में जाने की अनुमति होगी, जिससे वे संसदीय लोकतंत्र के रूप में भारत की यात्रा के बारे में जान सकें.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुताबिक नए संसद भवन के निर्माण के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि वायु और ध्वनि प्रदूषण न हो. सेंट्रल विस्टा पुर्निवकास परियोजना के तहत नए भवन का निर्माण मौजूदा भवन के पास किया जाएगा. इस परियोजना के तहत एक नए त्रिकोणीय संसद भवन, एक संयुक्त केंद्रीय सचिवालय और राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे राजपथ के पुर्निनमाण की परिकल्पना है.
अंग्रेजों ने 1927 में बनाया था मौजूदा संसद भवन, भूकंपरोधी भी नहीं
ज्ञात हो कि मौजूदा भवन, ब्रिटिश काल है जिसका डिजाइन एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर ने तैयार किया था. उन दोनों ने ही नयी दिल्ली का निर्माण किया था. मौजूदा संसद भवन की आधारशिला 12 फरवरी 1921 को रखी गई थी और इसके निर्माण में छह साल लगे थे तथा उस वक्त 83 लाख रुपये की लागत आई थी. उदघाटन समारोह 18 जनवरी 1927 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन के हाथों हुआ था. मौजूदा भवन भूकंपरोधी भी नहीं है. जिस दौरान इस संसद भवन का निर्माण हुआ, उस वक्त केवल एक ही सदन होता था. लेकिन आजादी के बाद लोकसभा और राज्यसभा के रूप में दो सदन बनने पर सदस्यों को बैठने के लिए जगह की कमी होने लगी. वर्तमान में कई सांसदों को प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठना पड़ता है, जिसे सांसद की गरिमा के खिलाफ माना जाता है.





