मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 6:34 · नई दिल्ली संस्करण

प्रदर्शनकारी किसान आंदोलन और तेज करने की तैयारी में, आठ दिसंबर को 'भारत बंद'

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नए कृषि सुधार कानून को लेकर किसानों का हो रहा विरोध प्रदर्शन अब और भी ज्यादा अक्रामक होने वाला है। किसाना संगठनों ने शुक्रवार को आठ दिसंबर को ‘भारत बंद’ की घोषणा की है। किसान संगठन के नेताओं ने कहा कि आठ दिसंबर को किसान टोल प्लाजा पर भी कब्जा करेंगे। साथ ही कहा कि एमएसपी पर सरकार से बात चल रही है लेकिन हम तीनों कानून वापस करवा कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि केंद्र सरकार शनिवार की वार्ता के दौरान उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है, तो वे नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करेंगे। एक अन्य किसान नेता हरविंदर सिंह लखवाल ने कहा, ''आज की हमारी बैठक में, हमने आठ दिसंबर को 'भारत बंद' का आह्वान करने का फैसला किया है, जिस दौरान हम सभी टोल प्लाजा पर भी कब्जा कर लेंगे।''

कहा, दिल्ली की शेष सड़कें अवरुद्ध करेंगे

हरविंदर सिंह ने कहा कि यदि इन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया, तो हमने आने वाले दिनों में दिल्ली की शेष सड़कों को अवरुद्ध करने की योजना बनाई है।

दिल्ली के बॉर्डर बिंदुओं पर पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों का प्रदर्शन लगातार नौ दिनों से जारी है। किसान नेताओं और सरकार के बीच गुरुवार को हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका था।

प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका है कि केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और किसानों को बड़े औद्योगिक घरानों की अनुकंपा पर छोड़ दिया जाएगा।

सरकार लगातार कह रही है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे और इनसे कृषि में नई तकनीकों की शुरूआत होगी। किसानों और सरकार के बीच शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत होनी है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें