मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:19 · नई दिल्ली संस्करण

बंगाल एसआईआर : चुनाव आयोग की चेतावनी- दस्तावेजों को गलत तरीके से अपलोड करना गंभीर अपराध

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बंगाल एसआईआर : चुनाव आयोग की चेतावनी- दस्तावेजों को गलत तरीके से अपलोड करना गंभीर अपराध

कोलकाता। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान बिना लिस्ट वाले पहचान दस्तावेजों को लिस्टेड दस्तावेजों के तौर पर क्लियर करने और अपलोड करने को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एईआरओ) की 'गंभीर और जानबूझकर की गई' गलती माना जाएगा।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के ऑफिस के सूत्रों ने बताया कि आयोग की ओर से सुनवाई सेशन की निगरानी के लिए नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पहले ही 'गंभीर और जानबूझकर की गई' गलतियों के कुछ मामलों को सामने लाया है।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में आयोग सबसे पहले संबंधित ईआरओ और एईआरओ से लिखित स्पष्टीकरण मांगेगा कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए? अगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आयोग संबंधित ईआरओ या एईआरओ के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा, जिसमें सेवा से सस्पेंशन और एफआईआर दर्ज करना शामिल हो सकता है।

अधिकारी ने कोलकाता के एक मामले का हवाला देते हुए अपराध की प्रकृति को समझाया। उन्होंने कहा, "एक खास वोटर के मामले में संबंधित ईआरओ ने मतदाता की ओर से पेश किए गए सहायक पहचान दस्तावेज के रूप में पासपोर्ट का उल्लेख किया। हालांकि, असल में सिस्टम में अपलोड की गई फोटो मतदाता के आधार कार्ड की थी।

यह 'गंभीर और जानबूझकर की गई' गलती का एक मामला था।

इसके अनुसार, आयोग ने पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट चुनावी रोल पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई की समीक्षा में लगे माइक्रो-ऑब्जर्वर की जिम्मेदारियों में 2 फरवरी से बदलाव की घोषणा की है, जो वर्तमान में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के हिस्से के रूप में चल रहा है।

फिलहाल, माइक्रो-ऑब्जर्वर को सुनवाई केंद्रों पर यह सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया है कि कार्यवाही आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की जाए। हालांकि, सोमवार से उन्हें यह निगरानी करने का काम सौंपा जाएगा कि सुनवाई के दौरान मतदाताओं की ओर से पेश किए गए पहचान दस्तावेजों को सही ढंग से और कमीशन की निर्धारित सूची के अनुसार सख्ती से अपलोड किया गया है या नहीं।

माइक्रो-ऑब्जर्वर यह सुनिश्चित करेंगे कि सहायक पहचान प्रमाण के रूप में सिर्फ आयोग की तरफ से तय दस्तावेज ही अपलोड किए जाएं। वे जांच के पहले स्तर के रूप में काम करेंगे, जिसके बाद विशेष रोल ऑब्जर्वर उन मामलों की पहचान करने और उन्हें फिल्टर करने के लिए आगे की समीक्षा करेंगे, जहां बिना लिस्ट वाले दस्तावेज अपलोड किए गए हो सकते हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें