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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:42 · नई दिल्ली संस्करण

राज्यसभा में ‘जय हिंद-वंदे भारत’ पर रोक, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन: पप्पू यादव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राज्यसभा में ‘जय हिंद-वंदे भारत’ पर रोक, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन: पप्पू यादव

पटना। राज्यसभा बुलेटिन में सांसदों को शिष्टाचार और परंपरा का हवाला देते हुए जय हिंद और वंदे मातरम् जैसे नारे नहीं लगाने की सलाह दी है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने खुलकर इसकी आलोचना की है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद एवं कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने शनिवार को इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करार दिया।

राज्यसभा में भाषणों में 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' के नारों पर बैन लगाने पर पप्पू यादव ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "यह हर किसी का बोलने का अधिकार है, चाहे कोई 'वंदे मातरम', 'जय हिंद', 'वाहेगुरु', 'सत श्री अकाल', या 'हर हर महादेव' कहे। हर किसी की अपनी आजादी है। लेकिन अगर सरकार किसी चीज को थोपे, तो वह गलत है। संविधान के तहत कार्य करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं है।

उन्होंने एसआईआर को लेकर हो रहे विवाद पर कहा, "उत्तर प्रदेश में कई बीएलओ की मौत हो गई। इससे ही पता चलता है कि चुनाव आयोग का तरीका गलत है। सही समय दिया जाना चाहिए। एसआईआर की जांच होनी चाहिए और इसे साइंटिफिक और ट्रांसपेरेंट तरीके से लागू किया जाना चाहिए। बिहार में जिस तरह से गरीब और आम लोगों के वोट करने के अधिकार को छीन कर लोकतंत्र को खत्म किया गया, वैसा नहीं होना चाहिए।"

राज्यसभा में जय हिंद और वंदे मातरम् जैसे नारे नहीं लगाने वाले विवाद पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "राष्ट्रीय प्रतीक का नारा लगाना और उसका इस्तेमाल करना राजनीतिक विमर्श का विषय क्यों बन जाता है? निश्चित रूप से इससे बचना चाहिए।

तमाम राजनीतिक दलों ने इस देश के संविधान के प्रति अपनी समर्पण व्यक्त की है। संविधान जिन प्रतीकों के इस्तेमाल की इजाजत देता है, उन पर विमर्श किया जाना और आलोचना किया जाना कहीं से उचित नहीं है।"

शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के सदन में नारे लगाने और भाजपा को चुनौती देने के मामले पर नीरज कुमार ने कहा, "ऐसी कोई चुनौती नहीं है। जनता ने उन लोगों को पहले ही नकार दिया है।"

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