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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:17 · नई दिल्ली संस्करण

श्रावण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील, 'योगी की पाती' में सीएम का संदेश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
श्रावण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील, 'योगी की पाती' में सीएम का संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के अवसर पर प्रदेशवासियों को संबोधित अपनी मासिक अपील 'योगी की पाती' जारी करते हुए सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक समरसता को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोकमंगल और सामूहिक सहभागिता का भी संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। शिव को जल अर्पित करने की परंपरा भी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण की भावना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देता है और श्रावण का महीना इसी भाव को आत्मसात करने का अवसर है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्षा ऋतु के आगमन के साथ धरती हरियाली से आच्छादित होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के दौरान सामूहिक श्रम तथा सहयोग भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को दर्शाता है।

वहीं शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की आस्था समाज में सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत करती है।

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जो जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

साथ ही उन्होंने राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसायटी द्वारा प्रतिदिन हजारों लीटर जल का रेन वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल पुनर्भरण में उपयोग किए जाने की पहल का उल्लेख करते हुए इसे अनुकरणीय बताया।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते दोहन के दौर में प्रकृति से जितना लिया जाए, उतना उसे लौटाने का संकल्प भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सद्भाव का महीना बनाने का आह्वान करते हुए प्रत्येक बूंद जल और प्रत्येक पौधे के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनसहभागिता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बनेगी।

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