Bihar: प्रशांत किशोर को तिरहुत में झटका, शिक्षक नेता भूषण झा ने लगाया 'तानाशाही' का आरोप, निर्दलीय ताल ठोकी

बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए जाने के महज 24 घंटे के अंदर ही प्रमुख शिक्षक नेता भूषण झा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। जानकारी के मुताबिक जन सुराज ने 24 सितंबर को अपनी दूसरी लिस्ट में 3 नाम घोषित किए थे, जिसमें तिरहुत शिक्षक सीट से भूषण झा को उम्मीदवार बनाया गया था। इसके अगले ही दिन 25 सितंबर को मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर स्थित एक होटल में समीक्षा बैठक हुई, जिसमें खुद प्रशांत किशोर मौजूद थे। इसी बैठक के बाद भूषण झा ने पार्टी छोड़ने का फैसला ले लिया।
भूषण झा ने एक प्रेस बयान जारी कर जन सुराज पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "जब मैं अपनी बात रख रहा था तो मेरे साथ गए शिक्षक साथियों को बैठक की रिकॉर्डिंग करने से रोक दिया गया। मुझ पर दबाव बनाया गया कि आपको वही बोलना है जो मैं कहूं, जो मुझे आपत्तिजनक लगा।" उन्होंने आगे कहा कि मेरे साथ गए शिक्षक साथी भी जन सुराज के इस व्यवहार से असहज महसूस करने लगे। बैठक से निकलने के बाद मैंने सैकड़ों शिक्षक साथियों से बात की, जिसमें अधिकतर ने मुझे स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की सलाह दी। एक और बड़ा आरोप लगाते हुए झा ने कहा कि पूरी समीक्षा बैठक में प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में तिरहुत शिक्षक सीट से मेरा नाम तक नहीं लिया, जबकि मुझे उम्मीदवार के तौर पर बुलाया गया था।
भूषण झा के पार्टी छोड़ने के बाद जन सुराज ने आनन-फानन में तिरहुत शिक्षक सीट पर नया उम्मीदवार घोषित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने श्याम नंदन यादव को नया प्रत्याशी बनाया है। आपको बता दें कि बिहार विधान परिषद की 8 सीटों - पटना स्नातक, पटना शिक्षक, तिरहुत स्नातक, तिरहुत शिक्षक, दरभंगा स्नातक, दरभंगा शिक्षक, कोसी स्नातक और सारण शिक्षक - पर चुनाव होना है। इसके लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी, 6 अक्टूबर तक नामांकन होंगे और 23 अक्टूबर को वोटिंग जबकि 27 अक्टूबर को गिनती होगी। चुनाव से पहले उम्मीदवार का यूं 24 घंटे में पार्टी छोड़ना प्रशांत किशोर के लिए बड़ी किरकिरी माना जा रहा है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भूषण झा का अपना बड़ा जनाधार है और अब उनके निर्दलीय लड़ने से जन सुराज का खेल बिगड़ सकता है।
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