मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:47 · नई दिल्ली संस्करण

अमेरिका में हड़कंप: इस बड़ी वजह के कारण ट्रंप ने अपने ही 50 अधिकारियों का करवाया पॉलीग्राफ टेस्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अमेरिका में हड़कंप: इस बड़ी वजह के कारण ट्रंप ने अपने ही 50 अधिकारियों का करवाया पॉलीग्राफ टेस्ट

अमेरिका ने ईरान युद्ध से जुड़ी अहम जानकारी मीडिया को लीक करने के मामले में अपनी जांच तेज़ कर दी है। ट्रंप प्रशासन के दौरान, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने लगभग 50 जॉइंट स्टाफ़ सदस्यों का पॉलीग्राफ़ टेस्ट किया। इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि ईरान युद्ध के बारे में गोपनीय जानकारी पत्रकारों को किसने लीक की। सबसे पहले, आइए समझते हैं कि पॉलीग्राफ़ टेस्ट क्या होता है। पॉलीग्राफ़ टेस्ट को आम तौर पर 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' (झूठ पकड़ने वाला टेस्ट) कहा जाता है।

टेस्ट के दौरान, जब कोई व्यक्ति सवालों के जवाब देता है, तो उसकी सांस लेने की गति, दिल की धड़कन और शरीर में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है। इन बदलावों के आधार पर, जांच करने वाले यह समझने की कोशिश करते हैं कि जवाब देते समय उस व्यक्ति के शरीर ने कैसी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, तनाव में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति झूठ ही बोल रहा है। इसलिए, पॉलीग्राफ टेस्ट को जांच का एक साधन माना जाता है, न कि पक्का सबूत। मुख्य खबर पर वापस आएं तो, यह जानकारी अमेरिकी समाचार एजेंसी 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के 'जॉइंट स्टाफ' से जुड़े करीब 50 कर्मचारी जांच के दायरे में आए।

इसमें मिलिट्री अफ़सरों के साथ-साथ कुछ सिविलियन कर्मचारी भी शामिल हैं। पिछले महीने उनसे पूछताछ की गई थी कि क्या उन्होंने अमेरिका के कम होते हथियारों के स्टॉक के बारे में किसी पत्रकार को जानकारी दी थी। मामला सिर्फ़ आम मिलिट्री जानकारी लीक करने का नहीं है। जांच उन रिपोर्टों पर केंद्रित है जिनमें ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के कुछ अहम हथियारों की कमी का ज़िक्र किया गया था। चूंकि ऐसे हथियार युद्ध में बहुत अहम होते हैं, इसलिए उनसे जुड़ी जानकारी को बहुत संवेदनशील माना जाता है। अमेरिकी जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मिलिट्री सिस्टम के अंदर से यह जानकारी कैसे लीक हुई। इसी वजह से जॉइंट स्टाफ़ के कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

पॉलीग्राफ टेस्ट इस बड़ी जांच का हिस्सा है। पेंटागन ने जांच से जुड़ी खास जानकारी देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि विभाग कर्मचारियों के अंदरूनी मामलों या चल रही जांच पर कोई टिप्पणी नहीं करता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने के सभी मामलों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है और उनकी पूरी जांच की जाती है। पेंटागन, अर्लिंग्टन, वर्जीनिया में स्थित यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेंस का मुख्यालय है। फ़िलहाल, जांच का मुख्य सवाल यह है कि ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी हथियारों की स्थिति से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्रकारों तक कैसे पहुँची?

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें