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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

महिला सहयोगी के जरिए बंगाल के मंत्रियों के परिवारों को निशाना बनाने का आरोप, एसटीएफ ने किया खुलासा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
महिला सहयोगी के जरिए बंगाल के मंत्रियों के परिवारों को निशाना बनाने का आरोप, एसटीएफ ने किया खुलासा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-आपराधिक समूह 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' (एसबीएन) ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हमिम मंडल की महिला सहयोगी अर्पिता सरकार के जरिए पश्चिम बंगाल कैबिनेट के करीब छह मौजूदा सदस्यों के परिवारवालों को निशाना बनाया।

एसबीएन के हैंडलर अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एन्क्रिप्टेड मैसेज के ज़रिए अर्पिता सरकार के साथ लगातार संपर्क में रहते थे।

राज्य पुलिस के सूत्रों ने बताया कि हालांकि अर्पिता मुख्य रूप से हमिम मंडल की सहयोगी थी लेकिन बाद के समय में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-आपराधिक समूह के हैंडलर मंडल को दरकिनार कर सीधे उससे संपर्क करने लगे और अलग से निर्देश देने लगे।

अब तक की जांच से पता चला है कि राज्य कैबिनेट के सदस्यों के परिवार वालों के अलावा, राज्य के प्रशासनिक तंत्र में कुछ अन्य प्रभावशाली लोगों को भी अर्पिता के जरिए 'हनी-ट्रैप' (प्यार के जाल में फंसाकर जानकारी हासिल करना) करने के लिए निशाना बनाया गया था।

मंडल और अर्पिता दोनों को पिछले हफ्ते एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।

शुक्रवार सुबह पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान जिले के बर्धमान शहर से सबसे पहले मंडल को गिरफ्तार किया गया जबकि उसी रात पड़ोसी राज्य झारखंड के साहिबगंज से अर्पिता को गिरफ्तार किया गया।

सोशल इन्फ्लुएंसर सरकार के दो मोबाइल फोन एसटीएफ ने जब्त किए हैं।

इन दो मोबाइल फोन से उसके और एसबीएन हैंडलर के बीच हुए एन्क्रिप्टेड और कोड वाले मैसेज को डिकोड करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

पता चला है कि पूछताछ के दौरान मंडल ने एसबीएन हैंडलर से अर्पिता सरकार का परिचय कराने की बात कबूल की थी। हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि हनी-ट्रैपिंग के लिए उसकी क्षमता को समझने के बाद, एसबीएन हैंडलर सीधे उससे संपर्क करने लगे और उसी के अनुसार उसे निर्देश देने लगे।

सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि सरकार ने एक योजना के तहत पश्चिम बंगाल में कई प्रभावशाली लोगों (जिनमें कुछ राजनेता भी शामिल थे) से संपर्क बनाना शुरू किया था, जिसका एकमात्र मकसद उनसे गोपनीय जानकारी हासिल करना था। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उसके द्वारा शेयर की गई सोशल मीडिया रील्स लोगों को आकर्षित करने का एक जरिया थीं।

मंडल और सरकार से पूछताछ के बाद, जांचकर्ताओं ने 'राना', 'उजैर', 'आबिद जाट333' और 'हमाद' जैसे अन्य सोशल मीडिया हैंडल का पता लगाया।

जांच से पता चला कि ये सभी सोशल मीडिया हैंडल पाकिस्तानी हैंडलर्स के थे। जांच में यह भी सामने आया कि इन पाकिस्तानी हैंडल्स ने ब्रिटेन और मैक्सिको के सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था।

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