एमसीडी की पदोन्नति सूची में भारी अनियमितता का आरोप, आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा हमला — "दलित शिक्षकों का हक मार रही है बीजेपी", बोले नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग

एमसीडी की पदोन्नति सूची में भारी अनियमितता का आरोप, आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा हमला — "दलित शिक्षकों का हक मार रही है बीजेपी", बोले नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग
नई दिल्ली, 12 जुलाई 2025 |दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई पदोन्नति सूची पर राजधानी की राजनीति में घमासान मच गया है। आम आदमी पार्टी ने इसे 'दलित विरोधी और भ्रष्टाचार से ग्रस्त प्रक्रिया' करार देते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा शासित एमसीडी के शिक्षा विभाग ने जानबूझकर दलित और आदिवासी शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित किया है और अपने करीबी लोगों को नियमों की अनदेखी कर आगे बढ़ाया है।
❝ एमसीडी की सीनियरिटी और प्रमोशन लिस्ट में जातिगत भेदभाव और नियमों की अनदेखी ❞
अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी ने जो वरिष्ठता सूची और पदोन्नति सूची जारी की है, उसमें व्यापक अनियमितताएं हैं। “जब वरिष्ठता सूची ही गलत है, तो उसके आधार पर बनाई गई पदोन्नति सूची कैसे सही हो सकती है?” उन्होंने उदाहरणों के साथ बताया कि कैसे 1997-98 में नियुक्त दलित शिक्षक, जिनकी जॉइनिंग पहले हुई, उन्हें सूची में जानबूझकर नीचे रखा गया और बाद में नियुक्त शिक्षकों को प्रमोट कर दिया गया।
उन्होंने कहा, “वरिष्ठता सूची में टीचर रुचिका की नियुक्ति मार्च 1998 की है, जबकि सुनीता की नियुक्ति फरवरी 1997 की है, फिर भी सूची में रुचिका को ऊपर और सुनीता को नीचे दिखाया गया है।” यह सीधे तौर पर डीओपीटी (DOPT) के नियमों की अवहेलना है, जिसके अनुसार जॉइनिंग की तारीख ही वरिष्ठता का आधार होनी चाहिए।
❝ प्रमोशन सूची में नाम गायब, वरिष्ठ दलित शिक्षकों को किया गया नजरअंदाज़ ❞
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि एमसीडी की आधिकारिक प्रमोशन लिस्ट में कई नाम जानबूझकर गायब किए गए हैं, और उनमें अधिकांश एससी/एसटी श्रेणी से संबंधित शिक्षक हैं। उदाहरण के तौर पर, वरिष्ठता क्रमांक 18,517 पर दर्ज हरी मोहन मीणा (एसटी) को प्रमोशन नहीं दिया गया, जबकि उनके बाद के क्रमांक 18,518 और 18,519 के शिक्षकों को पदोन्नति मिल गई।
इसी प्रकार, भारत लाल मीणा, जिनकी नियुक्ति 9 जनवरी 1997 को हुई थी, उन्हें छोड़कर श्यामलाल मीणा, जिनकी नियुक्ति 9 अप्रैल 1997 को हुई थी, को प्रमोशन दे दिया गया। यह असमानता सिस्टम में गहरे बैठे भेदभाव की ओर इशारा करती है।
❝ दलित विरोधी मानसिकता और बीजेपी का दोहरा चरित्र ❞
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा को दलित विरोधी मानसिकता से ग्रसित बताते हुए कहा कि “भाजपा सिर्फ भाषणों में बाबा साहब अंबेडकर की बात करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनके बनाए संविधान के मूल सिद्धांत — ‘समानता’ और ‘समान अवसर’ — की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि 1997-98 के दौरान भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के प्रभाव से कई अपात्र व्यक्तियों को एमसीडी में शिक्षक नियुक्त किया गया और अब वही लोग भ्रष्टाचार के लाभार्थी बन रहे हैं।
“बीजेपी यह कहेगी कि डीएसएसबी की मेरिट रैंक के आधार पर प्रमोशन दिया गया, लेकिन डीएसएसबी (DSSSB) की स्थापना ही 1999 में हुई। फिर 1995 से 1998 के शिक्षकों की मेरिट रैंक कैसे तय हुई?” — यह सवाल भाजपा की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
❝ पारदर्शिता का अभाव, पोर्टल पर जानकारी भी नहीं साझा की गई ❞
अंकुश नारंग ने यह भी आरोप लगाया कि एमसीडी ने वरिष्ठता सूची और प्रमोशन सूची को पोर्टल पर सार्वजनिक नहीं किया, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि पूरी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और पक्षपात हुआ है। उन्होंने मांग की कि मेयर राजा इकबाल सिंह को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि ये सूचियां कैसे और किन मापदंडों पर बनाई गईं।
❝ शिक्षा विभाग के भीतर भ्रष्टाचार, देश की नींव को कर रहा कमजोर ❞
अंकुश नारंग ने कहा कि शिक्षा विभाग देश की नींव तैयार करता है, बच्चों का भविष्य गढ़ता है, और जब उसी विभाग में भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव होगा, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया कैसे सुदृढ़ होगी? उन्होंने कहा, “बीजेपी को केवल कागज़ों पर काम करना बंद करना चाहिए और ज़मीन पर पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। वरना एमसीडी की हालत और बिगड़ेगी।”
उन्होंने एससी/एसटी आयोग से फौरन हस्तक्षेप करने की मांग की है और कहा है कि यदि न्याय नहीं मिला तो पार्टी न्यायिक लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटेगी।
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा की यह विवाद केवल एक प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और संविधान के मूल सिद्धांतों की अनदेखी से जुड़ा मामला है। दलित शिक्षकों को उनके न्यायोचित अधिकारों से वंचित करना, केवल एक जातीय भेदभाव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदारी से भी वंचित करना है।
आम आदमी पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करती रहेगी, और भाजपा पर दबाव बनाएगी कि वह जातिगत और पक्षपातपूर्ण निर्णयों से बाज आए।





