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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:40 · नई दिल्ली संस्करण

अखिलेश ने अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम पर यूपी सरकार की शर्तों को बताया अतार्किक

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अखिलेश ने अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम पर यूपी सरकार की शर्तों को बताया अतार्किक

लखनऊ। सपा प्रमुख व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार की ओर से लगाई गई शर्तों पर सोशल मीडिया के जरिए तीखा तंज किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि सरकार ने शर्तें इतनी बढ़ा दी हैं कि “आंख व मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते।”

सपा प्रमुख व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि यूपी की भाजपा सरकार विशेष समाज के सम्मान की अवहेलना कर रही है और अपमान का रास्ता अपनाकर समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि मंत्री, सांसद, विधायक और पार्षद भी इस मामले में समाज के सामने अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं और अपनी स्वार्थपूर्ण राजनीति के कारण समाज में अपना सम्मान खो चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सच्चे शुभचिंतक अन्य दलों से संपर्क साध रहे हैं, जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म और समाज का सम्मान किया और उन्हें यथोचित मान-स्थान प्रदान किया। वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि कोविड-19 के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का अनुपालन भाजपा की अपनी बैठकों या आयोजनों में किस तरह किया गया। अखिलेश यादव ने इसे असंगत और अतार्किक बताया और कहा कि इसी कारण “बाटी-चोखा” वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गई थी।

उन्होंने कहा, “अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सत्ता की पहचान होती है।

निंदनीय और घोर आपत्तिजनक, विनाशकाले विपरीत बुद्धि।"

बता दें कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देते हुए सख्त नियम और शर्तें लागू की हैं ताकि शांति, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इन शर्तों के अनुसार किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर सीमित संख्या में ही वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा और पार्किंग की व्यवस्था इस तरह की जाएगी कि यातायात बाधित न हो।

इसके साथ ही आयोजकों को केवल पारंपरिक ध्वज-दंड रखने की अनुमति होगी और किसी भी प्रकार की घातक वस्तु लाने पर रोक रहेगी। शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या तेज संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी और ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी और आवश्यक होने पर पुलिस बल की व्यवस्था का खर्च भी आयोजकों को वहन करना होगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो कार्यक्रम की अनुमति स्वतः निरस्त कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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