तीरथ सिंह रावत के बाद ममता की कुर्सी पर भी मंडरा सकता है 'संवैधानिक संकट'!
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद क्या बाद बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कुर्सी पर भी संवैधानिक संकट मंडरा सकता है? अब कुछ ऐसे ही सवाल सियासी गलियारों में उठने लगे हैं।
कोलकाता : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद क्या बाद बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कुर्सी पर भी 'संवैधानिक संकट' मंडरा सकता है? अब कुछ ऐसे ही सवाल सियासी गलियारों में उठने लगे हैं। भले ही रावत के इस्तीफे को भाजपा के अंदरूनी हालात से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन यह बात भी सच है कि उनके इस्तीफे के पीछे संवैधानिक संकट भी था। कुछ ऐसी ही परिस्थिति का सामना बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके कुछ मंत्रियों को भी करना पड़ सकता है।
ममता बनर्जी भी विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। ममता ने चार मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थीं। उन्हें शपथ लेने के छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना जरूरी है और यह संवैधानिक बाध्यता भी है। ममता बनर्जी ने उपचुनाव लड़ने के लिए अपनी पुरानी भवानीपुर सीट खाली भी करा ली है। लेकिन वह विधानसभा का सदस्य तभी बन पाएगीं जब अवधि के अंदर चुनाव कराए जाएंगे। कोरोना महामारी की वजह से फिलहाल चुनावी प्रक्रिया स्थगित की गई है। चुनाव कब होंगे इस को लेकर फैसला चुनाव आयोग को करना है। अगर चुनाव आयोग चार नवंबर तक चुनावी प्रक्रियाओं को खत्म करने का निर्णय नहीं लेता है तो ममता की कुर्सी पर भी खतरा हो सकता है। हालांकि सरकार ने चुनाव आयोग से रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए आग्रह किया है। आयोग ने कल दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए ममता सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है।
विधान परिषद का रास्ता भी मुश्किल
-ममता ने हालात को समझते हुए विधान परिषद के गठन वाला रास्ता निकालने की कोशिश की हैं। छह जुलाई को सरकार विधान परिषद बनाने की सिफारिश की जांच के लिए तदर्थ समिति की रिपोर्ट पर चर्चा और आगामी बजट सत्र में इसे पारित करने के लिए पेश करेगी। लेकिन यह केंद्र की मंजूरी के बगैर संभव नहीं है। केंद्र सरकार के साथ ममता बनर्जी के रिश्ते जगजाहिर हैं। ऐसे में विधान परिषद वाला रास्ता फिलहाल उनके लिए मुश्किल ही नजर आ रहा है।





