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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:30 · नई दिल्ली संस्करण

एडवोकेट डॉ. संदीप की शिकायत पर पूर्व कुलपति पर हुई ईडी की कार्रवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

मेरठ,। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. आरपी

सिंह की अवैध संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉड्रिंग मामले में

जब्त किया है। यह कार्रवाई सच संस्था के अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट के

अधिवक्ता डॉ. संदीप पहल की शिकायत पर हुई। ईडी की इस कार्रवाई से

विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

बरेली कॉलेज बरेली के प्रोफेसर

डॉ. आरपी सिंह दो मार्च 2003 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति

बनाए गए थे। उनके कार्यकाल में कई अनियमितताएं हुई। इसके खिलाफ मेरठ की सच

संस्था के अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. संदीप पहल ने शिकायत

दर्ज कराई थी। इस मामले में जांच कराने से लेकर कार्रवाई कराने तक में डॉ.

संदीप पहल लगातार संघर्ष करते रहे। इसी का परिणाम रहा कि डॉ. आरपी सिंह को

27 मई 2005 को कुलपति पद से हटा दिया गया। कुलपति पर इनमें सीपीएमटी

एंट्रेंस एग्जाम में धांधली, दैनिक वेतन पर कर्मचारियों की नियुक्ति में

धांधली समेत कई आरोप लगाए गए। 21 सितंबर 2020 को उत्तर प्रदेश विजिलेंस ने

पूर्व कुलपति डॉ. आरपी सिंह, प्रो. एचएस बालियान, पूर्व वित नियंत्रक सीके

सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके बाद विजिलेंस ने मनी लॉड्रिंग का

मामला दर्ज किया और इसकी जांच अब प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। ईडी ने

तीनों आरोपितों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, सैलरी एकाउंट का विवरण, बैंक का

नाम, शाखा, खाता संख्या, जनवरी 2003 से अप्रैल 2024 तक उन्हें दिए गए वेतन

का महीनेवार विवरण, इस समय के दौरान तीनों के द्वारा इम्मोवेबल प्रॉपर्टी

रिअर्न में घोषित विवरण, विश्वविद्यालय में व्याप्त तीनों के किसी भी अन्य

ऐसेट व लायबिलिटी का विवरण, तीनों की वर्तमान पोस्टिंग का विवरण,

विश्वविद्यालय की ओर से की गई जांच की प्रतियां व रिपोर्ट, तीनों की ओर से

धनराशि को लेकर की गई अनियमितता का विवरण भी मांगा था। ईडी के असिस्टेंट

डायरेक्टर जयकुमार ठाकुर की ओर से 16 मई को जारी पत्र का विश्वविद्यालय के

कुलसचिव ने जवाब भेजा था। इसके बाद ईडी ने पूर्व कुलपति की 3.21 करोड़ रुपए

की संपत्ति जब्त कर ली।

अधिवक्ता डॉ. संदीप पहल ने आरपी सिंह के

खिलाफ राज्यपाल से लेकर देश के राष्ट्रपति को शिकायतें भेजी थी। इन

शिकायतों पर कार्रवाई कराने के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। अभी तक हुई

जांच में सामने आया है कि डॉ. आरपी सिंह ने करोड़ों रुपये की घूस लेकर 150

से ज्यादा बीएड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को मान्यता दी। भवनों के निर्माण

में भी धांधली हुई। उन्होंने सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में प्रो. हरेंद्र

सिंह बालियान को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपए का पेमेंट कराया। चौधरी

चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति पद से बर्खास्तगी के बाद आरपी सिंह को

राजस्थान के जोधपुर विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया। इसके बाद महर्षि

दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के कुलपति बनाए। 2020 में भ्रष्टाचार

निरोधक ब्यूरो की टीम ने कुलपति डॉ. आरपी सिंह और उनके निजी गार्ड रणजीत

सिंह को दो लाख 20 हजार की रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।

एसीबी जयपुर और अजमेर की टीमों ने नागौर के एक प्राइवेट कॉलेज में सीटें

बढ़ाए जाने के मामले में ली गई घूस के मामले में कार्रवाई की थी।

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