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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:34 · नई दिल्ली संस्करण

बारापुला फ्लाईओवर प्रोजेक्ट में देरी पर एसीबी का शिकंजा, अज्ञात अधिकारी व ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बारापुला फ्लाईओवर प्रोजेक्ट में देरी पर एसीबी का शिकंजा, अज्ञात अधिकारी व ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर

नई दिल्ली,। दिल्ली के बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के निर्माण में हुई अत्यधिक देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7ए और 13 के तहत अज्ञात सरकारी अधिकारी और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ दर्ज की गई है।

दिल्ली के उपराज्यपाल ने अक्टूबर 2025 में इस मामले की जांच के आदेश दिए थे और कहा गया था कि इससे सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ का नुकसान हो सकता है। यह संज्ञान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर लिया गया था।

8 जुलाई 2025 को हुई व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में भी इस परियोजना की देरी पर चिंता जताई गई थी।

ईएफसी ने गैर-सक्षम अधिकारियों द्वारा मध्यस्थता पुरस्कार स्वीकारने और देरी पर गहन जांच की सिफारिश की थी।

एसीबी अब परियोजना से जुड़े सारे दस्तावेज की जांच कर रही है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी रिकॉर्ड एसीबी को सौंप दें।

फ्लाईओवर की बात करें तो यह 3.5 किलोमीटर लंबा चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो सराय काले खां में बारापुल्ला फ्लाईओवर से जुड़ेगा।

इसे 2011 में मंजूरी मिली थी और दिसंबर 2014 में 1,260.63 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी। अप्रैल 2015 में एल एंड टी को निर्माण का ठेका सौंपा गया। यह परियोजना अक्टूबर 2017 तक पूरी होनी थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण, पेड़ कटाई की अनुमति में देरी और विभागीय लापरवाही के चलते प्रोजेक्ट पिछड़ गया।

अब इसे जून 2026 तक पूरा करने की उम्मीद है। अब तक लगभग 1,238.68 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, जबकि नई अनुमानित लागत बढ़कर 1,330 करोड़ रुपए हो गई है।

फिलहाल एसीबी ने निर्माण में हुई अत्यधिक देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी को लेकर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं एल एंड टी ने भी एसीबी जांच में सहयोग का भरोसा दिया है।

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