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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:15 · नई दिल्ली संस्करण

‘आप’ का कदम, सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने को सभापति को लिखेगी पत्र

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
‘आप’ का कदम, सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने को सभापति को लिखेगी पत्र

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गई है। ‘आप’ के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने घोषणा की है कि पार्टी उन सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता समाप्त कराने के लिए राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखेगी, जिन्होंने हाल ही में भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है।

संजय सिंह ने कहा कि इन सांसदों का भाजपा में शामिल होना पूरी तरह से असंवैधानिक, गैर-कानूनी और संसदीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की दसवीं अनुसूची (एंटी डिफेक्शन लॉ) के तहत किसी भी प्रकार का दल-बदल वैध नहीं माना जाता, चाहे वह दो-तिहाई संख्या के आधार पर ही क्यों न किया गया हो।

उन्‍होंने कहा कि वह राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर सभी नियमों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देंगे, ताकि भाजपा में शामिल हुए सभी सातों सांसदों की सदस्यता रद्द की जा सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं, ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इस मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी आम कार्यकर्ताओं की ताकत से बनी है और कुछ नेताओं के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विभिन्न एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कई नेता दबाव में आकर पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन आम कार्यकर्ता अभी भी मजबूती से पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपना मनोबल बनाए रखें और सरकार से सवाल पूछना जारी रखें।

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आलोचना से बचने के लिए विपक्ष को तोड़ने की रणनीति अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं पर पहले जांच एजेंसियों की कार्रवाई होती है, वही बाद में भाजपा में शामिल होने पर ‘स्वच्छ’ घोषित कर दिए जाते हैं।

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