बिहार के युवक का कमाल, बिना गैस, आग आराम से बन सकेगी चाय, कॉफी, नूडल्स

हसपुरा के एक युवक ने कमाल का आविष्कार कर दिया है। अब लोग बिना गैस बिजली के इस्तेमाल से खाना गर्म कर सकते है। जिससे हमें ये सुविधा होने वाली है कि अगर हम यात्रा कर रहे है तो आसानी से हमारा खाना गर्म रहेगा। जाने इससे जुड़ी पूरी बात।
हसपुरा के एक युवक ने कमाल का आविष्कार किया है। इस युवक के बनाये यंत्र से गैस-बिजली का इस्तेमाल किये न केवल खाना गर्म किया जा सकता है बल्कि गर्म पेय भी बनाया जा सकता है। हालांकि स्टूडेंट ने पहले यह आविष्कार हॉस्टल में रहनेवाले छात्रों के लिए और ट्रैकिंग तथा सफर के दौरान इस्तेमाल के लिए किया लेकिन अब इसका कॉमर्शियल प्रोटोटाईप भी उपलब्ध है। हसपुरा के छात्र व युवा उद्यमी ने किया यह आविष्कार- दरअसल यह आविष्कार हसपुरा के श्री भास्कर नगर निवासी इंटर द्वितीय वर्ष के छात्र एवं युवा उद्यमी सागर कुमार ने किया है। सागर के इस यंत्र यानी चूल्हे के माध्यम से बिना गैस, बिजली या लकड़ी के चाय, कॉफी और नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थ तैयार की जा सकती है।
टिफिन के आकार का हैं यह यंत्र, रासायनिक प्रक्रिया से उत्पन्न गर्मी से गर्म होता हैं खाना-टिफिन के आकार के इस उपकरण में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से गर्मी उत्पन्न की जाती है। सागर के अनुसार, इस तकनीक से करीब दस मिनट में पानी को लगभग 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है। तकनीक को पेटेंट भी हुआ हासिल, इन परिस्थितियों में उपयोग के लायक यह उपकरण-सागर को अपनी इस तकनीक का पेटेंट भी मिल चुका है। सागर ने अपने इस प्रोडक्ट का नाम ‘सिपजो’ दे रखा है। इसका उद्देश्य यात्रा, छात्रावास, कार्यस्थल, आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में बिना गैस या बिजली के आसानी से गर्म भोजन और पेय उपलब्ध कराना है। सागर के अनुसार, इसके प्रारंभिक नमूने का 100 से अधिक लोगों के बीच प्रत्यक्ष ग्राहक परीक्षण भी किया जा चुका है।
कई संस्थानों में नवाचार के लिए हुआ उपकरण का चयन-सागर के स्टार्टअप का चयन आईआईटी पटना, एआईसी-नालंदा, इनक्यूबिन फाउंडेशन और एमटीआर विश्वविद्यालय,महाराष्ट्र से जुड़े स्टार्टअप एवं नवाचार कार्यक्रमों में आगे के अनुसंधान, मार्गदर्शन और उद्यम विकास के लिए हुआ है। सागर का लक्ष्य स्वयं गर्म होनेवाले भोजन एवं पेय के लिए उपयोगी और सुरक्षित तकनीक विकसित करना है, जिसका उपयोग यात्रियों, विद्यार्थियों, कार्यस्थलों और आपातकालीन परिस्थितियों में किया जा सके। बचपन से कुछ अलग करने की थी।
सागर की सोच-सागर के पिता महेश कुमार ने बताया कि उनका पुत्र बचपन से हीं पढ़ाई में मेधावी रहा है। कम उम्र से ही वह कुछ अलग करने और नए प्रयोग करने की सोच रखता था।सागर ने बताया कि पढ़ाई-लिखाई सहित नए कार्यों में परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। सागर का मानना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को यदि तकनीकी मार्गदर्शन, अनुसंधान की सुविधा और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। कम उम्र में नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में सागर की यह पहल क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बनी है।
सागर द्वारा बनाए गए इस उपकरण में दो चैम्बर बने है। उपर वाले चैंबर में गर्म किये जानेवाले पेय पदार्थ या भोजन रखे जाते है। वही नीचे वाले चैंबर में पानी भरा जाता है। पानी वाले चैंबर में ही एक रसायन डाला जाता है, जिसकी अभिक्रिया से पानी गर्म होने लगता है इसी की उष्मा से उपर के चैंबर में रखा भोजन या पेय गर्म हो जाता है। इस यंत्र से 100 डिग्री तक का तापमान उत्पन्न होता है, जो किसी खाद्य पदार्थ को उबालने के लिए पर्याप्त है। सागर ने रसायन का नाम बताने से यह कहते हुए परहेज किया कि नाम बताने से लोग डुप्लीकेसी शुरू कर सकते है।
ऐसे आया आईडिया-सागर ने बताया कि पढ़ाई के दौरान रात में जागने के लिए कॉफी या चाय की तलब होती थी। इसका समाधान यही था कि चाहे तो चूल्हे पर चाय-कॉफी बनाए या थर्मस बोतल में गर्म रखे चाय-कॉफी का इस्तेमाल करे। इस स्थिति में थर्मस में रखा कॉफी-चाय ज्यादा देर हो जाने के बाद गर्म नही रहता था। इसी वजह से उन्होने इसके विकल्प की सोंची और डेढ़ साल की मेहनत के बाद यह आविष्कार सामने आया। सागर ने बताया कि उन्होने इस यंत्र का कॉमर्शियल प्रोटोटाईप भी तैयार किया है। यदि इसे घरेलू या व्यावसायिक इस्तेमाल में लाया जाता है तो संभव है कि इस पर आनेवाला खर्च एलपीजी से थोड़ा-बहुत ज्यादा पड़े।




