दादा की जमीन का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, मोबाइल से 2 मिनट में ऐसे निकालें पूरा रिकॉर्ड

अक्सर गांव में लोगों की सबसे बड़ी परेशानी होती है पुरानी जमीन के कागज खो जाना। दादा-परदादा के समय की जमीन तो है, लेकिन खतौनी, खसरा नंबर या जमाबंदी का पता नहीं। पटवारी के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन अब सरकार ने सारे जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए हैं। आप घर बैठे सिर्फ मोबाइल से 2 मिनट में अपनी जमीन का पूरा रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं। हर राज्य ने अपना अलग पोर्टल बनाया है। जैसे यूपी के लिए भूलेख (upbhulekh.gov.in), बिहार के लिए भूमि जानकारी (biharbhumi.bihar.gov.in), राजस्थान के लिए अपना खाता, मध्यप्रदेश के लिए MP Bhulekh, महाराष्ट्र के लिए महाभूलेख।
स्टेप बाय स्टेप तरीका उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य लेते है। अपने मोबाइल में Google पर टाइप करें - UP Bhulekh। पहली वेबसाइट upbhulekh.gov.in खोलें। वहां "खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें" पर क्लिक करें। अब अपना जिला, तहसील और गांव चुनें। इसके बाद खातेदार के नाम, खसरा नंबर या खतौनी संख्या में से किसी एक से सर्च करें। अगर खसरा नंबर नहीं पता तो सिर्फ नाम से सर्च करें। आपके दादा या परदादा का नाम लिस्ट में आ जाएगा। उस पर क्लिक करते ही पूरी जमीन का विवरण - खसरा नंबर, रकबा, किसके नाम है - सब दिख जाएगा। इसी तरह बिहार में आपको अपना जिला, अंचल, मौजा सेलेक्ट करना होता है।
कई बार 1950-60 की जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं होता। उस स्थिति में आपको दो काम करने होंगे: तहसील में जाकर पुराने बस्ता से "खतौनी की नकल" निकलवाएं। वहां 50 साल पुराना रिकॉर्ड भी मिल जाता है। अगर जमीन आपके दादा के पिता के नाम है तो वंशावली (परिवार रजिस्टर) बनवानी पड़ेगी। प्रधान से परिवार रजिस्टर की नकल लेकर तहसीलदार से प्रमाणित कराएं। इससे साबित होगा कि आप उसी परिवार के वारिस हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड देखने के बाद उसका प्रिंट निकाल लें। वो प्रिंट ही डिजिटल खतौनी है। उसे तहसील में ले जाकर प्रमाणित मोहर लगवा लें।
वही असली कागज के रूप में मान्य होगा। अगर जमीन की रजिस्ट्री खो गई है तो सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से Certified Copy निकलवा सकते हैं, मात्र 100-200 रुपये में। जमीन का खसरा नंबर अपने खेत के पास के किसी किसान से पूछ लें, उससे सर्च करना आसान हो जाता है। हर साल अपनी जमीन की जमाबंदी चेक करते रहें ताकि कोई दूसरा व्यक्ति अपना नाम न चढ़वा ले। फर्जी वेबसाइटों से बचें, सिर्फ सरकारी वेबसाइट gov.in वाली ही खोलें। अब पटवारी या लेखपाल के पीछे भागने की जरूरत नहीं। मोबाइल से ही पता चल जाएगा कि आपके दादा-परदादा के नाम कितनी जमीन थी और अब वो किसके नाम पर है।




