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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:47 · नई दिल्ली संस्करण

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक को DUAC की मंजूरी: जानिए ये है आयोग की सख्त शर्तें

दिल्ली अर्बन आर्ट्स कमीशन ने राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक स्मारक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक को DUAC की मंजूरी: जानिए ये है आयोग की सख्त शर्तें

दिल्ली अर्बन आर्ट्स कमीशन ने राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक स्मारक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ दी गई है, जिसमें सबसे प्रमुख यह है कि स्मारक का आर्किटेक्चर, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और लैंडस्केपिंग राजघाट पर पहले से मौजूद स्मारकों के स्वरूप और सादगी के अनुरूप होनी चाहिए। यह निर्णय आयोग की 25 अगस्त को हुई बैठक में लिया गया, जहां स्मारक के आर्किटेक्चरल डिजाइन, लैंडस्केप, सामग्री, लोगों की पहुंच और आसपास की चीजों पर विस्तृत चर्चा की गई और इसे मिनट्स में दर्ज किया गया।

आयोग ने प्रोजेक्ट अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्मारक के बाहरी रूप-रंग पर असर डालने वाले किसी भी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले आयोग के सामने लाया जाए और उसकी मंजूरी ली जाए। इस प्रस्ताव को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने पेश किया था और आयोग ने आर्किटेक्ट के साथ गहन चर्चा करके इसकी जांच-पड़ताल की थी। कमीशन की एक मुख्य शर्त राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर पहले से मौजूद समाधियों के साथ इस नए स्मारक के संबंध से जुड़ी है। डीयूएसी ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय से मिली मंजूरी का हवाला देते हुए बताया कि स्मारक के आसपास के माहौल, प्राकृतिक परिवेश और पहले से मौजूद स्मारकों के साथ तालमेल और सामंजस्य बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

मिनट्स में साफ तौर पर कहा गया है कि प्रस्तावित समाधि का आर्किटेक्चरल डिजाइन, लैंडस्केप डिजाइन, सामग्री और रंगों का चयन, फर्श, बाहरी हिस्से की बनावट और अन्य बाहरी चीजों का तालमेल राष्ट्रीय स्मृति स्थल में मौजूद समाधियों के पहले से तय दृश्य और आर्किटेक्चरल स्वरूप के साथ सही ढंग से बिठाया जाएगा।कमीशन ने इस बात पर जोर दिया कि राजघाट इलाके का अपना एक खास आर्किटेक्चरल और लैंडस्केप स्टाइल है, जिसमें सादगी भरे स्मारक डिजाइन और खुले लैंडस्केप वाले माहौल की झलक मिलती है।

आयोग का कहना है कि नए स्मारक को अपनी अलग पहचान बनाए रखनी चाहिए, लेकिन साथ ही उसे आसपास के बड़े इलाके के साथ देखने में भी मेल खाना चाहिए। स्मारक के निर्माण में सफेद मार्बल या सफेद ग्रेनाइट के इस्तेमाल पर विचार करने को भी कहा है, ताकि देखने में एकरूपता बनाए रखी जा सके और इन सामग्रियों और रंगों का मिलान पहले से मौजूद समाधियों के साथ करके देखा जाए।

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