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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

चंपत राय की चिट्ठी में 33 बिंदु, मंदिर निर्माण समिति के फैसलों पर उठे सवाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
चंपत राय की चिट्ठी में 33 बिंदु, मंदिर निर्माण समिति के फैसलों पर उठे सवाल

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने गुरुवार को बयान के रूप में नौ पन्नों की चिट्ठी जारी की।इसमें उन्होंने 33 बिन्दुओं पर चर्चा की। उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को लेकर कई अहम दावे किए । राय ने कहा है कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम फैसले लिए। यही नहीं फैसले लेते समय उन्होंने किसी अन्य के फैसले को महत्व नहीं दिया।

चंपत राय ने दावा किया कि मंदिर निर्माण के फैसलों में नृपेंद्र मिश्र के फैसलेे प्रमुख रहे ।

उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण के लिए जो ट्रस्ट बनाया, उसमें 15 ट्रस्टी लिखे गए। इसके अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र बनाए गए। राय ने कहा कि उन्हीं के सुझावों के आधार पर एल एंड टी को मंदिर निर्माण के लिए चुना गया। उन्होंने बताया कि भवनों ने निर्माण के लिए नोएडा की फर्म डिजाईन एसोसिएट (फर्म प्रमुख जय काकतीकर) को नृपेन्द्र मिश्रा ने ही चुना।

उन्होंने चिट्ठी मे लिखा कि

यह भी सत्य है कि नृपेन्द्र मिश्र के कारण पत्थरों से बना इतना विशाल मंदिर जून 2020 में कोरोना काल से प्रारम्भ होकर जून 2026 तक पूर्ण रूप से समाज को समर्पित हो गया। यह केवल नृपेन्द्र मिश्र के प्रयत्नों का परिणाम है। जब कभी कोई बाधा आई तत्काल संबंधित विषय के देश के योग्यतम व्यक्तियों को उन्होंने निवेदन करके अयोध्या बुला लिया और उनके परामर्श के आधार पर वह बाधा दूर हो गई। यह भी सत्य है कि अधिकांश विद्वानों ने यहां सेवाभाव से सुझाव दिए अर्थात कोई पारिश्रमिक श्री राम जन्भूमि तीर्थ क्षेत्र से नहीं लिया।

राय ने कहा कि अनूप मित्तल जो कभी एनबीसीसी के चेयरमेन रहे, वे मंदिर निर्माण समिति के सदस्य भी हैं। वह सिविल इंजीनियर हैं। सदैव इंजीनियरिंग विषय पर नृपेन्द्र मिश्र के सलाहकार रहे। नृपेन्द्र के सभी लिखित कार्य अनूप ही करते थे। उदाहरण के लिए निर्माण समिति बैठकों के विवरण तैयार करना, संबंधित व्यक्तियों को भेजना आदि, अनूप के साथ एक युवा सिविल इंजीनियर यश मित्तल सदैव आये, वे तत्काल अपने लैपटॉप पर हर विषय को टाइप करते थे। उसी के आधार पर सब कार्य होते थे। यह प्रशंसनीय है। कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्राहलय उत्तर प्रदेश सरकार की सम्पत्ति है। नृपेन्द्र मिश्र ने सोचा कि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी एक संग्रहालय बनाना है। छोटे से कस्बे में दो संग्रहालय व्यवहारिक नहीं हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों से वार्ता की। उन्होंने स्वीकार कर लिया।

उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में लिखित अनुबंध हुआ। 30 वर्ष के लिए संग्रहालय भवन तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लीज पर प्राप्त हो गया। उसे देखने पर सब ने अनुभव किया कि इसका पूर्ण जीर्णोद्धार आवश्यक है। नृपेन्द्र मिश्र ने संग्रहालय के सम्पूर्ण कार्य की देखभाल के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय से सेवा निवृत्त संजीब सिंह का चयन किया। वे अयोध्या आ गए। सभी कार्य संभाल लिया।

राय के अनुसार, वास्तुकार जयकाकतीकर ने ड्राइंग बनाई। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को जीर्णोद्धार कार्य सौंप दिया गया। इंजीनियर इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को जीर्णोद्धार कार्य की देखभाल का कार्य सौंपा गया। संजीब सिंह ने संग्रहालय में 20 गैलरी की रूपरेखा तैयार की। ट्रस्ट के अध्यक्ष मिश्र ने कुछ कार्यों को विकसित करने और संग्रहालय में लगाने का कार्य आई.आई. टी. मद्रास को सौंप दिया।

उन्होंने अयोध्या आकर देखा और कार्य प्रारम्भकर दिया। प्रति मास मंदिर निर्माण समिति की बैठक के साथ-साथ संग्रहालय से संबंधित कार्यों के लिए ही दो-तीन सत्रों में नृपेन्द्र मिश्र ने संबंधित सभी व्यक्तियों के साथ बैठना प्रारम्भ कर दिया। धीरे-धीरे कार्य आगे बढ़ रहा है। संभावना है कि दिसम्बर 2027 तक संग्रहालय समाज को देखने के लिए खोल दिया जाएगा।

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