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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:15 · नई दिल्ली संस्करण

इतिहास के पन्नों में 12 फरवरीः चार्ल्स डार्विन न होते तो कौन बताता हमारे पूर्वज बंदर हैं

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
इतिहास के पन्नों में 12 फरवरीः चार्ल्स डार्विन न होते तो कौन बताता हमारे पूर्वज बंदर हैं

देश-दुनिया

के इतिहास में 12 फरवरी की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख ने

दुनिया को चार्ल्स डार्विन के रूप में ऐसा प्रकृतिविद् दिया, जिसकी खोज से

यह सिद्ध हुआ कि मनुष्य के पूर्वज बंदर थे। चार्ल्स डार्विन का जन्म 12

फरवरी 1809 को हुआ था। चार्ल्स का पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगता था। उन्हें

कीड़े-मकोड़े और प्रकृति के बारे में जानने का शौक था। चार्ल्स डार्विन के

पिता रॉबर्ट डार्विन और मां सुसान डार्विन दोनों ही जाने-माने डॉक्टर थे।

इसलिए वो चाहते थे कि चार्ल्स भी डॉक्टर बनें।

पिता की लाख

कोशिश के बावजूद चार्ल्स नहीं सुधरे तो एक दिन हारकर उन्होंने कहा,

"तुम्हें शिकार करने और चूहे पकड़ने के अलावा और किसी चीज की परवाह नहीं

है। ऐसे तो तुम न केवल अपनी बल्कि अपने पूरे खानदान की बदनामी कर दोगे।" यह

बात चार्ल्स को चुभ गई। इसके बाद वह यह पता लगाने में जुट गए कि पृथ्वी पर

जीवन कैसे आया?

दिसंबर 1831 में जब चार्ल्ड की उम्र 22 साल थी, तब

उन्हें बीगल नाम के जहाज से दुनिया में घूमने का मौका मिला। चार्ल्स ने

मौका हाथ से जाने नहीं दिया। रास्ते में जहां-जहां जहाज रुका, वहां चार्ल्स

उतरकर जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों, पत्थरों-चट्टानों और कीट-पतंगों को देखने

लगे और उनके नमूने जमा करने लगे। कई सालों तक काम करने के बाद उन्होंने

बताया कि इस पृथ्वी पर जितनी भी प्रजातियां हैं, वो मूल रूप से एक ही जाति

की उत्पत्ति हैं। समय और हालात के साथ-साथ इन्होंने अपने आप में बदलाव किया

और अलग-अलग प्रजाति बन गईं।

24 नवंबर, 1859 को चार्ल

डार्विन की किताब "ऑन द ओरिजन ऑफ स्पेशीज बाय मीन्स ऑफ नेचरल सिलेक्शन'

छपी। इस किताब में एक भाग था, ‘थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन।’ इसी में बताया गया

था, कैसे हम बंदर से इंसान बने? उनका मानना था कि हम सभी के पूर्वज एक हैं।

उनकी थ्योरी थी कि हमारे पूर्वज बंदर थे। लेकिन कुछ बंदर अलग जगह अलग तरह

से रहने लगे। इस कारण धीरे-धीरे जरूरतों के अनुसार उनमें बदलाव आने शुरू हो

गए। उनमें आए बदलाव उनके आगे की पीढ़ी में दिखने लगे।

उन्होंने

समझाया था कि ओरैंगुटैन (बंदरों की एक प्रजाति) का एक बेटा पेड़ पर, तो

दूसरा जमीन पर रहने लगा। जमीन पर रहने वाले बेटे ने खुद को जिंदा रखने के

लिए नई कलाएं सीखीं। उसने खड़े होना, दो पैरों पर चलना, दो हाथों का उपयोग

करना सीखा। पेट भरने के लिए शिकार करना और खेती करना सीखा। इस तरह

ओरैंगुटैन का एक बेटा बंदर से इंसान बन गया। हालांकि, ये बदलाव एक-दो साल

में नहीं आया बल्कि इसके लिए करोड़ों साल लग गए। इसी थ्योरी की वजह से

उन्हें दुनियाभर में पहचान मिली। जो पिता कभी कहते थे कि उनका बेटा पूरे

खानदान की बदनामी कराएगा। आज उनकी पहचान चार्ल्स डार्विन की वजह से ही है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1502ः वास्को द गामा भारत की दूसरी यात्रा के लिए अपने जहाज में लिस्बन से रवाना।

1544ः इंग्लैंड में राजद्रोह के आरोप में जेन जेन ग्रे को मौत की सजा।

1610ः फ़्रांस नरेश हेनरी चतुर्थ ने जर्मन प्रोटेस्टेंट यूनियन के साथ समझौता किया।

1689ः विलियम और मेरी इंग्लैंड के राजा-रानी घोषित।

1736ः नादिरशाह फ्रांस का शासक बना।

1762ः ब्रिटेन की नौसेना ने कैरेबियाई द्वीप मार्टिनिक पर कब्जा किया।

1818ः दक्षिण अमेरिकी देश चिली को स्पेन से स्वतंत्रता मिली।

1885ः जर्मन ईस्ट अफ़्रीका कंपनी का गठन।

1899ः जर्मनी ने स्पेन से मेरिनास कैरोलिन और पिल्यू द्वीप खरीदे।

1912ः चीन में मंचु वंश ने गद्दी छोड़ी।

1922ः महात्मा गांधी ने कांग्रेस कार्यकारिणी समिति काे असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने के लिए राजी किया।

1928ः गांधी जी ने बारदोली में सत्याग्रह की घोषणा की।

1934ः फ्रांस में सभी श्रमिक हड़ताल गए।

1953ः सोवियत संघ ने इजराइल के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़े।

1974ः मास्को में नोबेल पुरस्कार विजेता सोवियत संघ के अलेक्जेंडर सोल्जेनित्शिन को गिरफ्तार किया गया।

1975ः भारत चेचक मुक्त घोषित।

1988ः

द्वितीय विश्वयुद्ध में सात लाख लोगों की हत्या के सिलसिले में 86 वर्षीय

एड्रिया आर्टुकोविक को मुकदमा चलाने के लिए अमेरिका से यूगोस्लाविया भेजा

गया।

1996ः यासर अराफात को गाजा में फिलिस्तीन के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।

1998ः अमेरिकी कंपनी राइसटेक को बासमती चावल का पेटेंट मिला।

2000ः पंडित रविशंकर फ़्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कॉमनडियर डीला लीजंड डि आनर' से सम्मानित।

2002ः ईरान का विमान दुर्घटनाग्रस्त। 119 लोगों की मौत ।

2006ः एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, दुनिया से सबसे ज्यादा बदतर हालात नेपाल में।

2008ः पूर्वी तिमोर में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री पर हमले के बाद आपातकाल।

2009ः

भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व का पहला भैंस क्लोन विकसित किया। 2010ः

हरिद्वार महाकुंभ में लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।

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