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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

100 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाला, संभल के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
100 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाला, संभल के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी गिरफ्तार

संभल। उत्तर प्रदेश सरकार के भू-माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जांच में एक बार फिर प्रदेश का संभल जिले का नाम सामने आया है। यहां 100 करोड़ से अधिक की संभल मुरादाबाद मार्ग स्थित सरकारी बेशकीमती भूमि पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध कब्जा कराने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्यवाही की गई है। पुलिस ने प्रशासन के साथ भूमि कब्जा मुक्त कराने के साथ ही नगर पालिका परिषद के तत्कालीन आरोपित अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गुरुवार को उक्त भूमि घोटाले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जनपद में 3 दिन पूर्व जिलाधिकारी द्वारा ग्राम सभा की 101 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन के गबन मामले की जानकारी मिली थी। उस जमीन के जब आगे कागजात खंगाले गए तो लेखपाल के द्वारा एक तहरीर कोतवाली संभल को प्राप्त हुई, जिसमें तत्कालीन उप संचालक चकबंदी और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद संभल राजकुमार गुप्ता के द्वारा अपने निजी लाभ पाने के लिए दस्तावेजों में गड़बड़ी कर बदलते हुए बड़े गबन करने की जानकारी हाथ लगी। इसमें पता चला कि उपसंचालक चकबंदी ने कुछ फर्जी लोगों के नाम पर नामांतरण दर्ज किए और उसके बाद कुछ लोगों के द्वारा भूमि को अपना बताते हुए उच्च न्यायालय में रिट नियोजित की गई थी। उस रिट के खिलाफ तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता के द्वारा अपना निजी लाभ प्राप्त करने के लिए 2013 में हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है। इसके बाद यह मामला कई स्तरों पर जांच के दायरे में आया। वहीं ईओ के इस कदम के बाद कुल 101 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को इन (भूमाफियाओं) लोगों के द्वारा अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर खुद बुर्द कर दिया, जिससे सरकार को लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई। भूमि घोटाले की पुख्ता जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर उक्त सरकारी जमीन पर कब्जे को मौके पर जाकर देखा गया और उसके बाद में कब्जामुक्त कराया गया।

पुलिस का कहना है कि राजकुमार गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न्यायालय में भ्रामक शपथ पत्र प्रस्तुत किए और सरकारी भूमि को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल कराने में अहम भूमिका निभाई। इसके चलते इस मामले में थाना कोतवाली संभल में मु0अ0सं0 162/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, 409 तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

एसपी ने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपित राजकुमार गुप्ता को बीती रात गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपित वर्तमान में सहायक नगर आयुक्त शाहजहांपुर में तैनात हैं। जांच में यह भी सामने आया कि राजकुमार गुप्ता के खिलाफ एक 44 लाख रुपये के गबन का मामला है। वह 2022 में लिखा गया था। पूर्व में दो शासन स्तर पर दंड भी मिलने की बात प्रकाश में आई है। गिरफ्तार आरोपित रिटायरमेंट के एकदम पास है। उसके जिले में तैनाती के दौरान संभल के जो तत्कालीन अध्यक्ष रहे हैं उनसे भी पूछताछ की जा रही है। जिस व्यक्ति के खिलाफ जब-जब साक्ष्य मिलेंगे, उसके आधार पर उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वहीं इस मामले में नामजद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

एसपी ने जिले के निवासियों से अपील की है कि गिरफ्तार तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के समय संभल में हुए अन्य मामलों की जानकारी के लिए वे आगे आए और पुलिस की मदद करें, ताकि आरोपित को कठोर कार्यवाही कराई जा सके। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की पूरी विवेचना के विवेचक सीओ कुलदीप कुमार है। वह वर्तमान में इसमें बड़ी सघनता के साथ इसकी विवेचना कर रहे हैं। उम्मीद करता हूं कि जो भी संभलवासी हैं वह उनसे अपनी सूचनाओं को जरूर साझा करें ताकि समय रहते इस तरह के जो लोग सिस्टम के अंदर रहकर सिस्टम को ही दीमक की तरह खाने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी सफाई है वह की जा सके।

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