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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:41 · नई दिल्ली संस्करण

आदिवासियों के बलिदान के सम्मान की मांग, गणेश घोघरा का सरकार पर हमला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आदिवासियों के बलिदान के सम्मान की मांग, गणेश घोघरा का सरकार पर हमला

डूंगरपुर। डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने बांसवाड़ा जिले के ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित न करने को लेकर केंद्र सरकार के हालिया रुख पर कड़ा एतराज जताया है। हाल ही संसद में मानगढ़ धाम को लेकर दिए गए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के लिखित उत्तर के बाद विधायक घोघरा ने बुधवार को एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है।

विधायक गणेश घोघरा ने कहा कि 3 अगस्त 2026 को संसद में सरकार से सवाल पूछा गया था कि क्या राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाएगा? इस सवाल के लिखित उत्तर में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट मना कर दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है और मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता।

घोघरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2022 के मानगढ़ धाम दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में स्वयं प्रधानमंत्री मोदी मानगढ़ धाम की पवित्र भूमि पर आए थे और उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की दिशा में काम करने की बात कही थी। लेकिन अब संसद में मंत्री द्वारा दिया गया जवाब यह साबित करता है कि केंद्र सरकार की कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है।

विधायक घोघरा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1913 में संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1500 से अधिक भील आदिवासियों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। अंग्रेजों द्वारा किए गए इस नरसंहार को 'जलियांवाला बाग' से भी बड़ा हत्याकांड माना जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के इतिहास से आदिवासियों के इस महान बलिदान को मिटाने और किताबों के पन्नों से हटाने का प्रयास कर रही है, जो पूरे देश के आदिवासी समाज का अपमान है।

गणेश घोघरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करते हैं तथा मानगढ़ धाम को जल्द से जल्द राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं देते हैं, तो आने वाले समय में देश का संपूर्ण आदिवासी समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरेगा और एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करेगा।

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