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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:25 · नई दिल्ली संस्करण

पुरुषों के मुक़ाबले तीन गुना मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर महिलाओं को मिलता है राजनीति में स्थान-वसुन्धरा राजे

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
पुरुषों के मुक़ाबले तीन गुना मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर महिलाओं को मिलता है राजनीति में स्थान-वसुन्धरा राजे

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर उन्हें राजनीति में स्थान मिलता है।वे शनिवार को कॉन्सिट्यूशन क्लब में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम में बोल रही थीं। कार्यक्रम में जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने कहा कि जाट आरक्षण वसुन्धरा राजे ने बचाया। यहाँ तक कि धौलपुर और भरतपुर के जाटों को आरक्षण भी वसुन्धरा राजे ने दिलवाया।राजे ने कहा कि आजादी के समय भारत में महिलाओं की साक्षरता दर 9 प्रतिशत थी,आज 65 प्रतिशत है। देश के आम चुनावों में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत है, जबकि 1957 में सिर्फ 3 प्रतिशत ही थी। महिला सांसदों की संख्या पहली लोकसभा में 22 थी,आज 74 है। राज्यसभा में 1952 में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, आज 42 हो गई। लेकिन यह संख्या पर्याप्त नहीं है। यह संख्या पुरुषों के बराबर होना चाहिए।पूर्व सीएम ने कहा कि प्रतिभा पाटिल और द्रौपदी मुर्मू ने सिद्ध कर दिया कि शिक्षा सफलता की कुंजी है। डॉ.कमला बेनीवाल, हेमा मालिनी, सुमित्रा सिंह, डॉ.प्रियंका चौधरी, रीटा चौधरी, डॉ.शिखा मील और सुशीला बराला, पद्मश्री से सम्मानित कृष्णा पूनिया, कमला कंस्वा और दिव्या मदेरणा ने राजनीति के क्षेत्र में नाम किया है। विधायक डॉ.शिखा मील, पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया, पूर्व न्यायाधीश डॉ.राजेंद्र चौधरी ने भी संबोधित किया।

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