कोडरमा संसदीय सीट: भाजपा के सामने अपना किला बचाने की चुनौती

गिरिडीह
, । राज्य की कोडरमा लोकसभा सीट भाजपा की पारंपरिक सीट
मानी जाती है। भाजपा ने यहां हुए 13 लोकसभा चुनावों में छह बार जीत दर्ज की
है जबकि कांग्रेस दो बार। इस लोकसभा क्षेत्र में कोडरमा विधानसभा क्षेत्र
के अलावा हजारीबाग जिले का बरकट्ठा, गिरिडीह का धनवार, बगोदर, जमुआ और
गांडेय विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र को अभ्रक के लिए जाना
जाता है। साथ ही बिहार के बॉर्डर पर होने के कारण इसे झारखंड का प्रवेश
द्वार भी कहा जाता है। यहां से फिलहाल अन्नपूर्णा देवी सांसद हैं और केंद्र
में मंत्री भी हैं।
स्व रीतलाल वर्मा पांच बार बने सांसद
कोडरमा
लोकसभा सीट का गठन 1977 में हुआ था। 1977 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में
भारतीय लोकदल के रीतलाल प्रसाद वर्मा कोडरमा लोकसभा सीट से जीते थे। 1980
के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के रीतलाल प्रसाद वर्मा जीते। 1989 के
लोकसभा चुनाव में भाजपा के रीतलाल प्रसाद वर्मा फिर से इस सीट से जीते।
1991 के लोकसभा चुनाव में जनता दल ने यहां से जीत हासिल की । 1996 के
लोकसभा चुनाव में भाजपा के रीतलाल प्रसाद वर्मा एक बार फिर यहां से जीते।
1999 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तिलकधारी
प्रसाद सिंह जीते थे।
कोडरमा लोकसभा सीट पर पांच वर्ष पहले की तुलना
में इस बार चुनावी समीकरण काफी बदल गये हैं। इस बार यहां मुकाबला
त्रिकोणीय है। भाजपा की अन्नपूर्णा देवी, इंडी गठबंधन से विनोद सिंह और
निर्दलीय जयप्रकाश वर्मा यहां मुख्य प्रत्याशी हैं। कोडरमा में 15
प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद
अन्नपूर्णा देवी कोडरमा लोकसभा सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं। साल
2019 में राजद से भाजपा में शामिल हुईं अन्नपूर्णा देवी ने तब झाविमो
प्रत्याशी बाबूलाल मरांडी को 4 लाख 50 हजार वोटों से पराजित किया था। पर उस
समय से अभी स्थिति बदली हुई है। बाबूलाल भाजपा के होकर अब अन्नपूर्णा देवी
के लिए वोट मांग रहे हैं।
विधान सभावार पर बदले हालात
पर
विधान सभावार स्थिति का आकलन करें तो यह बहुत असरदायक नहीं दिख रहा। गांडेय
विधानसभा से अभी हो रहे उप चुनाव में झामुमो से कल्पना सोरेन चुनाव लड़ रही
हैं जिसका प्रभाव लोक सभा चुनाव पर भी दिखेगा। यहां से भाजपा विधायक रह
चुके जयप्रकाश वर्मा ने पिछली बार अन्नपूर्णा देवी के लिए वोट मांगे थे, पर
इस बार खुद लोक सभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी हैं, यह भी भाजपा के लिए
नुकसानदेह है। बगोदर विधायक विनोद सिंह इंडी गठबंधन के प्रत्याशी हैं तो
बगोदर में उनकी मजबूती स्वाभाविक है जो दिख भी रही है। धनवार विधानसभा में
भी भाकपा माले की मजबूत पकड़ रही है, राजकुमार यादव यहां से माले विधायक रहे
हैं। झामुमो और अन्य दलों के साथ से भी यह पकड़ और मजबूत हो गयी है। जमुआ
में भाजपा प्रत्याशी अन्नपूर्णा देवी, भाकपा माले के विनोद सिंह और
निर्दलीय जयप्रकाश वर्मा, फिलहाल तीनों की मजबूत पकड़ दिखती है।
बरकट्ठा
विधान सभा में पिछली बार 2019 में तत्कालीन विधायक जानकी यादव और वर्तमान
विधायक अमित यादव, दोनों ने भाजपा के लिए वोट मांगे थे और यहां भाजपा को
बड़ी बढ़त दिलायी थी। पर इस बार स्थिति बदली हुई है, भाजपा कार्यकर्ताओं की
नाराजगी तो दिखती ही है। जानकी यादव कुछ दिन पहले ही भाजपा को छोड़कर झामुमो
में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यहां भी पहले की स्थिति नहीं
रह गयी है।
कोडरमा विधानसभा में स्वाभाविक रूप से भाजपा यहां
आंकड़ों में मजबूत दिखती है। यहां से भाजपा की डॉ नीरा यादव विधायक हैं। पर
कोडरमा से सटे इंदरवा, डोमचांच नगर पंचायत या सांसद अन्नपूर्णा देवी के गृह
पंचायत चाराडीह में जिस कदर लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, वह कुछ नया
संकेत दे रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में जिला परिषद की अध्यक्ष रहीं
शालिनी गुप्ता ने भी भाजपा के लिए वोट मांगे थे। इस बार आजसू में होते हुए
भी वह भाजपा के पक्ष में नहीं दिख रही हैं। निश्चित तौर पर यह भी गणित के
हिसाब से भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित होगा। कुल मिला कर देखें तो भाजपा
के लिए इस बार कोडरमा सीट पर बड़ी चुनौती है। हालांकि अयोध्या में राममंदिर
का निर्माण , धारा 370 और फ्री अनाज सहित अन्य लाभुक योजनाओं से लाभान्वित
मतदाताओं का भाजपा प्रत्याशी की और प्रभावित होना स्वभाविक है। बावजूद
बदली हुई परिस्थितियों के कारण 2019 में हुई जीत का अंतर भी भाजपा दोहरा
पायेगी इसकी संभावना कम है।
प्रत्याशी कर रहे हैं अपनी-अपनी जीत के दावे
चुनाव
प्रचार में अन्नपूर्णा देवी ने लोगों से कहा कि आपका हर वोट देश की तरक्की
के लिए होगा। हर वोट महिलाओं एवं देश की सुरक्षा के लिए होगा, आपका हर वोट
देश के सम्मान के लिए होगा जो नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करेगा।
उन्होंने जीत के दावे किए।
विनोद सिंह ने कहा कि भाकपा माले आप
लोगों के हर न्याय के साथ खड़ी रहेगी। कभी यहां की समस्याओं को लेकर
वर्तमान सांसद मुखर नहीं रहीं, लोगों ने उन्हें अवसर दिया तो क्षेत्र के
विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। यह भी कहा कि इस बार कोडरमा बदल रहा है।
जयप्रकाश
वर्मा ने कहा कि कोडरमा में जनता इस बार बदलाव चाहती है। पिछले पांच साल
में इलाके में विकास का कोई काम नहीं दिखता है, माईका, पत्थर उद्योग ठप है
और लोग परेशान हैं। चुनाव में उन्हें हर तबके का साथ मिल रहा है। उन्होंने
जीत का दावा किया।
अब देखने वाली बात है कि 2024 के लोकसभा के समर में अन्नपूर्णा देवी फिर जीत दर्ज करती हैं या नहीं।





