थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर युद्ध जैसे हालात, अब तक 33 लोगों की मौत — कंबोडिया ने की तत्काल युद्धविराम की मांग
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर युद्ध जैसे हालात, अब तक 33 लोगों की मौत — कंबोडिया ने की तत्काल युद्धविराम की मांग
बैंकॉक/नोम पेन, 26 जुलाई 2025 — दक्षिण-पूर्व एशिया एक बार फिर से सैन्य तनाव के साए में आ गया है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले तीन दिनों से सीमा विवाद को लेकर जारी खूनी संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। लड़ाकू विमानों, भारी तोपों और जमीनी टुकड़ियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक कुल 33 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें आम नागरिक और सैनिक दोनों शामिल हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए कंबोडिया ने तत्काल सीजफायर की मांग की है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से दखल की अपील की है।
कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब तक देश के 5 सैनिक और 8 नागरिक इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं। वहीं, थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी दी कि थाई पक्ष में 13 आम नागरिकों और 7 सैनिकों की मृत्यु हुई है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, हजारों की संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। कंबोडिया की राजधानी नोम पेन और थाईलैंड के सीमावर्ती इलाकों में आपात राहत शिविर बनाए गए हैं।
इस संघर्ष की शुरुआत 24 जुलाई को हुई थी, जब थाई सीमा पर एक लैंडमाइन विस्फोट में थाई सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तोपखाने और रॉकेट दागे जाने लगे। संघर्ष का केंद्र प्राचीन "ता मुएन थॉम" मंदिर क्षेत्र रहा है, जो पहले भी दोनों देशों के बीच विवाद का विषय रहा है। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडियाई सेना ने सीमा का उल्लंघन किया, जबकि कंबोडिया ने थाईलैंड पर 'संप्रभु क्षेत्र में घुसपैठ और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान' पहुंचाने का आरोप लगाया है।
ASEAN देशों की ओर से मलेशिया ने संघर्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी सीमा पर शांति स्थापित करने के लिए सभी कूटनीतिक विकल्प अपनाने की सलाह दी है। भारत, चीन और अमेरिका जैसे क्षेत्रीय शक्तियों ने भी स्थिति पर निगरानी रखने की बात कही है।
हालात को देखते हुए थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है और सीमा पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहीं कंबोडिया ने कहा है कि अगर संघर्ष नहीं रुका, तो वह अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहायता की मांग करेगा। इस बीच सीमावर्ती गांवों में भय का माहौल बना हुआ है और स्कूल, बाजार, मंदिर जैसे सभी सार्वजनिक स्थान बंद कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 2008 से 2011 के बीच भी इसी क्षेत्र को लेकर कई बार टकराव हो चुका है। हालांकि तब भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए समाधान निकाला गया था। वर्तमान स्थिति में भी उम्मीद की जा रही है कि ASEAN, संयुक्त राष्ट्र और अन्य शक्तियाँ इस संकट को और गहराने से पहले शांतिपूर्ण समाधान निकालने में भूमिका निभाएंगी।
थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद केवल क्षेत्रीय वर्चस्व का मामला नहीं है, बल्कि इसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक जटिलताएं भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इस संघर्ष का जल्द और शांतिपूर्ण समाधान वैश्विक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।





