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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:40 · नई दिल्ली संस्करण

पीओके प्रदर्शन में हिंसा, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में ब्रिटिश नागरिक की मौत

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
पीओके प्रदर्शन में हिंसा, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में ब्रिटिश नागरिक की मौत

लंदन। पाकिस्तान कब्‍जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायर‍िंग में एक ब्रिटिश नागरिक की मौत हो गई। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के पीटरबरो शहर के रहने वाले 50 वर्षीय मोहम्मद अख्तर की 9 जून को मौत हो गई थी। उनके परिजनों का कहना है कि आर्थिक और चुनाव सुधारों की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से की गई गोलीबारी के दौरान उन्हें गोली लगी थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अन्य ब्रिटिश नागरिक दो महीने से अधिक समय से पीओके की एक जेल में बंद है। परिवार की ओर से ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय की मदद से उनकी रिहाई की कोशिशों के बावजूद अब तक उन्हें रिहा नहीं किया गया है।

इन मामलों से पता चलता है कि पीओके में हुए हिंसक घटनाक्रमों का असर उन ब्रिटिश नागरिकों पर भी पड़ा है, जिनके पारिवारिक संबंध इस क्षेत्र से जुड़े हैं। हाल के वर्षों में यह हिंसा पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानी जा रही है और इसमें कई लोगों की जान जा चुकी है।

मोहम्मद अख्तर पीओके के कोटली शहर में रह रहे थे, जो उस इलाके के करीब है जहां झड़पें हुई थीं। उनके परिवार का कहना है कि पाकिस्तानी बलों की गोलीबारी के दौरान उन्हें गोली लगी।

अख्तर के चचेरे भाई मोहम्मद साद ने द गार्डियन से कहा, “वह प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, लेकिन उनके घर के पास प्रदर्शन चल रहे थे।

उस दिन सुरक्षा बलों की ओर से गोलीबारी हुई थी और उन्हें एक गोली लग गई। उनके सीने के एक तरफ गोली का घाव था।”

साद ने बताया कि अख्तर के बच्चों ने इस मामले को ब्रिटिश अधिकारियों के सामने उठाने का फैसला नहीं किया।

उन्होंने कहा कि परिवार पीओके में पुलिस शिकायत भी दर्ज नहीं करा सका और उन्हें डर था कि मामले को ज्यादा उछालने से परिवार को खतरा हो सकता है।

इसी बीच, नॉटिंघम के रहने वाले 38 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक वकास आरिफ को 5 जून के प्रदर्शनों के बाद पीओके के मीरपुर शहर में हिरासत में ले लिया गया।

उनके परिवार का कहना है कि वह प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे।

उनकी बहन सुमेरा ने द गार्डियन से कहा, “वकास किसी भी तरह के प्रदर्शन में शामिल नहीं था। लेकिन मेरे दूसरे दो भाई प्रदर्शन में गए थे। इसके बाद पाकिस्तानी बल और रेंजर्स हमारे घर आए और मेरे भाइयों को अपने साथ ले गए।”

उन्होंने आगे कहा, “उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। उसने कुछ भी गलत नहीं किया। वह मेरा भाई है, लेकिन मुझे लगता है कि उसके जैसे हजारों लोग हैं जिन्हें जेल में डाल दिया गया है ताकि विरोध प्रदर्शन की ताकत कम की जा सके। उन्हें अदालत में भी पेश नहीं किया गया है।”

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