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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:52 · नई दिल्ली संस्करण

अमेरिकी टैरिफ में कटौती से भारत को बढ़त, प्रतिस्पर्धी देशों से कम हुआ शुल्क

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अमेरिकी टैरिफ में कटौती से भारत को बढ़त, प्रतिस्पर्धी देशों से कम हुआ शुल्क

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद, भारत को वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में अहम बढ़त मिलती दिख रही है। नए टैरिफ ढांचे में भारत कई प्रमुख निर्यातक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम शुल्क वाले देशों की श्रेणी में आ गया है।

वर्तमान टैरिफ स्थिति के अनुसार, भारत पर अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत रहेगा, जबकि इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत तथा चीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लागू है। इस तुलना में भारत अब एशियाई निर्यात प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है।

व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर भारत की सहमति के तहत, रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा लिया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद समाप्त करने के समझौते के तहत 25 प्रतिशत रूसी तेल-संबंधित टैरिफ को हटाया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने इसे ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़ा द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव बताया।

ट्रंप के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से, तथा संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “यह जानकर खुशी हुई कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा।”

उन्होंने कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र साथ काम करते हैं, तो इससे लोगों को लाभ होता है और सहयोग के नए अवसर खुलते हैं।

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ सीधे तौर पर भारत की रूसी तेल खरीद से जुड़ा था, जिसे अब नई दिल्ली की प्रतिबद्धता के बाद हटा दिया गया है। यह फैसला व्यापार नीति को ऊर्जा और भू-राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ने की अमेरिकी रणनीति को दर्शाता है।

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