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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:51 · नई दिल्ली संस्करण

यूपी ट्रेड शो–स्वदेशी मेला 2025 : स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा का मंच बना मेला, मधुबनी आर्ट ने लोगों को किया प्रभावित

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यूपी ट्रेड शो–स्वदेशी मेला 2025 : स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा का मंच बना मेला, मधुबनी आर्ट ने लोगों को किया प्रभावित

नोएडा। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में 10 दिवसीय “यूपी ट्रेड शो–स्वदेशी मेला 2025” का आयोजन नोएडा हाट, सेक्टर-33ए में शुरू हो गया है।

यह मेला न सिर्फ उत्तर प्रदेश के शिल्पियों, कारीगरों एवं स्थानीय उद्यमियों को अपनी कला और उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि अन्य राज्यों से आए कलाकार भी अपनी कला के लोगों के सामने रख रहे हैं।

प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित यह स्वदेशी मेला न सिर्फ पारंपरिक उत्पादों की व्यापक पहचान का माध्यम बन रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम भी साबित हो रहा है।

मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग, तसर सिल्क, खादी कॉटन, और चंदेरी कपड़े जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले में शामिल मधुबनी कला से जुड़े कलाकारों ने मांग उठाई है कि सरकार ऐसे पारंपरिक उत्पादों पर लगने वाले जीएसटी को कम करे ताकि उन्हें बाजार में उचित दाम मिल सके।

उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में इन हस्तशिल्पों को वैश्विक स्तर तक ले जाना चाहती है तो उन्हें विशेष पैकेज, सब्सिडी या कर छूट जैसी सुविधाएं दिए जाने की आवश्यकता है। तसर सिल्क उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने वाली उद्यमी शालिनी ने बताया, “हम यहां व्यापार नहीं, बल्कि कला को बढ़ावा देने आए हैं। हमारे स्टॉल पर 600 रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक के उत्पाद उपलब्ध हैं। लोग इन्हें सिर्फ वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देख रहे हैं।”

मेले में आने वाले आगंतुकों को पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने का भी अवसर मिलेगा।

आने वाले दिनों में विभिन्न जनपदों के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। स्वदेशी मेला 2025 न केवल खरीदारी का माध्यम है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और कला के पुनर्जागरण का भी प्रतीक बन गया है। उम्मीद है कि यह पहल उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और शिल्पकारों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाएगी।

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