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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:54 · नई दिल्ली संस्करण

ड्रोन आयात पर ट्रंप की टैरिफ स्ट्राइक, सुरक्षा को बनाया आधार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ड्रोन आयात पर ट्रंप की टैरिफ स्ट्राइक, सुरक्षा को बनाया आधार

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मानवरहित ड्रोन और उनके पुर्जों के आयात पर 100 फीसदी तक नए शुल्क लगाने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लिया गया है। इसका मकसद ड्रोन के क्षेत्र में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं, खासकर चीन पर निर्भरता कम करना है।

व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक नए उपायों के तहत कुछ खास तरह के मानव रहित विमान प्रणालियों पर 100 फीसदी टैरिफ लगेगा। इसमें 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले बड़े ड्रोन और वे सिस्टम शामिल हैं जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के हिसाब से संवेदनशील क्षमताएं हैं।

इन क्षमताओं में थर्मल इमेजर और डॉकिंग स्टेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल एडवांस ड्रोन ऑपरेशन में होता है।

छोटे ड्रोन पर नई नीति के तहत 25 फीसदी का कम टैरिफ लगेगा।

व्हाइट हाउस ने कहा कि इन टैरिफ का मकसद अमेरिका में ड्रोन और उनके पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों से विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटेगी और अमेरिका के अंदर एक मजबूत ड्रोन विनिर्माण उद्योग विकसित करने में मदद मिलेगी।

दुनिया के ड्रोन बाजार में अभी चीन की बड़ी भूमिका है। कई अध्ययनों के अनुसार 2006 में स्थापित चीनी कंपनी डीजीआई ने हाल के वर्षों में दुनिया के ड्रोन बाजार का दो तिहाई से ज्यादा हिस्सा अपने कब्जे में कर लिया है।

नए अमेरिकी टैरिफ ऐसे समय में आए हैं जब वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है।

यह तनाव खासकर एडवांस तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में देखा जा रहा है। ज्यादातर नए टैरिफ शुल्क 3 सितंबर से लागू होने की उम्मीद है।

यह घोषणा चीन के हालिया कदम के बाद आई है। पिछले हफ्ते बीजिंग ने अमेरिका को ड्रोन निर्यात पर पाबंदियां लगाने का ऐलान किया और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया।

चीन ने कहा कि यह कदम वाशिंगटन द्वारा जबरन श्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। चीन का यह कदम अमेरिका द्वारा चीन और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के कुछ दिन बाद आया है।

इन ताजा उपायों के साथ ड्रोन और उससे जुड़े पुर्जे भी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार प्रतिबंधों से प्रभावित उत्पादों की बढ़ती सूची में जुड़ गए हैं।

वाशिंगटन का कहना है कि नए टैरिफ घरेलू उत्पादन को मजबूत करेंगे और आयातित ड्रोन तकनीक पर निर्भरता कम करेंगे। वहीं यह पूरा विवाद व्यापार, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर रहा है।

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