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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:29 · नई दिल्ली संस्करण

नृसिंह द्वादशी पर त्रिपुष्कर योग, नोट कर लें राहुकाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
नृसिंह द्वादशी पर त्रिपुष्कर योग, नोट कर लें राहुकाल

नई दिल्ली। भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित नृसिंह द्वादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और नृसिंह भगवान से शत्रु नाश, संकट निवारण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

धर्म शास्त्रों में नृसिंह द्वादशी को गोविन्द द्वादशी भी कहा जाता है, इस दिन गोविन्द की पूजा की जाती है। शनिवार को नृसिंह द्वादशी पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो पूजा, दान, शुभ कार्यों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, 28 फरवरी को द्वादशी तिथि है, जो 27 फरवरी की रात 10 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 28 फरवरी की रात 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।

शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 47 मिनट पर, सूर्यास्त शाम 6 बजकर 20 मिनट पर होगा। नक्षत्र - पुनर्वसु सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक फिर पुष्य होगा, योग - सौभाग्य शाम 5 बजकर 2 मिनट तक, करण - बव सुबह 9 बजकर 36 मिनट तक फिर बालव रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 8 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट तक और अमृत काल सुबह 7 बजकर 18 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक है।

त्रिपुष्कर योग सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए विशेष शुभ है।

वहीं, शनिवार के अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 9 बजकर 41 मिनट से 11 बजकर 7 मिनट तक, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक, दुर्मुहूर्त सुबह 6 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक है।

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