मौत का डर या अंधविश्वास? इस बड़ी वजह से चीन और जापानी इमारतों की लिफ्ट और होटलों में नहीं होता 4 नंबर का बटन
चीन, हांगकांग, ताइवान जापान और सिंगापुर जैसे चीनी संस्कृति वाले क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और होटलों में चौथी मंजिल या 4 नंबर का कमरा अक्सर गायब रहता है।

चीन, हांगकांग, ताइवान जापान और सिंगापुर जैसे चीनी संस्कृति वाले क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और होटलों में चौथी मंजिल या 4 नंबर का कमरा अक्सर गायब रहता है। लिफ्ट में बटन देखने पर आपको 3 के बाद सीधे 5 नंबर दिखाई देगा या '4' की जगह 'F' या '3A' लिखा हुआ मिलेगा। पहली बार वहां जाने वाले पर्यटकों के लिए यह काफी हैरान करने वाला होता है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी सांस्कृतिक मान्यताएं और भाषाई कारण जुड़े हुए हैं। 4 अंक से जुड़ी इस तीव्र आशंका और डर को मनोविज्ञान में 'टेट्राफोबिया' कहा जाता है। पूर्वी एशियाई संस्कृतियों में 4 अंक को बहुत ही अशुभ माना जाता है।
इस डर का सबसे मुख्य कारण मंदारिन भाषा का शब्द-साम्य है। चीनी भाषा में अंक '4' का उच्चारण 'सी' किया जाता है। वहीं, चीनी भाषा में 'मृत्यु' या 'मौत' शब्द का उच्चारण भी 'सी' ही होता है। हालाँकि दोनों शब्दों को लिखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चीनी अक्षर अलग हैं और उनके बोलने का टोन (उतार-चढ़ाव) भी थोड़ा भिन्न होता है, लेकिन सुनने में ये दोनों शब्द बिल्कुल एक जैसे लगते हैं। इसी भाषाई समानता के कारण लोग 4 नंबर को सीधे तौर पर 'मौत' या 'दुर्भाग्य' से जोड़कर देखते हैं।
रियल एस्टेट और होटल उद्योग पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। 4 नंबर की मंजिल या जिस घर के पते में '4' आता है, उसे चीनी लोग खरीदने या किराए पर लेने से कतराते हैं। बिल्डर्स और होटल मालिक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए 4, 14, 24 या 34 जैसी सभी मंजिलों को छोड़ देते हैं। कुछ इमारतों में तो 40 से 49 तक की पूरी श्रृंखला ही गायब कर दी जाती है। होटलों में 4 नंबर के कमरे में रुकने को लोग अपनी यात्रा के लिए अशुभ मानते हैं। संक्षेप में, जैसे पश्चिमी देशों में 13 नंबर को अशुभ मानकर 13वीं मंजिल नहीं बनाई जाती, ठीक उसी तरह चीन में अंक 4 के उच्चारण का संबंध 'मृत्यु' से होने के कारण इसे घरों, होटलों और लिफ्ट के बटनों से दूर रखा जाता है। यह प्राचीन अंधविश्वास आज भी आधुनिक वास्तुकला को प्रभावित करता है।



