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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

दुनिया भर में बढ़ी बिहार के मखाने की मिठास! 20 से ज्यादा देशों में पहुंचा 7 हजार टन मखाना, सुपरफूड के रूप में उभरी पहचान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
दुनिया भर में बढ़ी बिहार के मखाने की मिठास! 20 से ज्यादा देशों में पहुंचा 7 हजार टन मखाना, सुपरफूड के रूप में उभरी पहचान

नई दिल्ली। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने वैल्यू-एडेड उत्पादों का निर्यात किया। सरकार ने शनिवार को कहा कि अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे बिहार के किसानों और मखाना उद्योग को बड़ा लाभ मिल रहा है।

भारत में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र बिहार है, जहां देश के कुल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है। मखाना क्षेत्र को और मजबूत बनाने तथा इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से मखाने के लिए एक अलग एचएस कोड लागू किया है, जिससे मखाना निर्यात की सटीक निगरानी और वैश्विक बाजारों में इसकी पहचान को बल मिला है।

इसी दिशा में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए अपेडा यानी कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने में मदद की।

बिहार के बिहटा स्थित बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना निर्यात किया गया।

यह खेप दरभंगा जिले के मखाना उत्पादक किसानों से खरीदी गई थी। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से न केवल बिहार के प्रमुख जीआई उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी मजबूत होगी, बल्कि निर्यात-आधारित बाजारों तक पहुंच बढ़ने से किसानों की आय में भी सुधार होगा।

सरकार के मुताबिक, इस निर्यात पहल से जुड़े किसानों को मौजूदा बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है। यह दर्शाता है कि निर्यात केंद्रित वैल्यू चेन और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की रणनीति से उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच मखाना भारतीय कृषि निर्यात का एक महत्वपूर्ण उत्पाद बनकर उभर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजारों में पहुंच बनने से आने वाले समय में बिहार के मखाना उद्योग को और गति मिलने की संभावना है।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना राज्य की पहचान है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की बढ़ती भागीदारी किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि बिहार सरकार मखाना उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देकर पूरी वैल्यू चेन को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। राज्य सरकार मखाना उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती रहेगी।

मंत्री ने विशेष रूप से फोरी समुदाय का भी उल्लेख किया, जिनकी पारंपरिक कौशल और विशेषज्ञता मखाना प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है।

उन्होंने कहा कि इस समुदाय को आगे भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि ऑस्ट्रेलिया को जीआई टैग वाले मिथिला मखाना का पहला समुद्री निर्यात बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का प्रमाण है।

इससे किसानों, निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए नए अवसर खुलेंगे और बिहार के मखाना क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

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