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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:40 · नई दिल्ली संस्करण

सुप्रीम कोर्ट ने राशिद खान की रिहाई के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सुप्रीम कोर्ट ने राशिद खान की रिहाई के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

नई दिल्ली। वर्ष 1993 के कोलकाता बोबाजार (बहूबाजार) बम धमाके के केस में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी मोहम्मद राशिद खान की रिहाई के खिलाफ दाखिल बंगाल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राशिद और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने राशिद खान की रिहाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट इस इस मामले पर 28 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा।

राशिद खान के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट से 5 जून को रिलीज का आदेश पारित हुआ था, उसको स्वास्थ्य सम्बंधी कई बीमारियां हैं।

30 साल से ज्यादा समय से जेल में है, उसका जेल में व्यवहार अच्छा था। इसलिए हाईकोर्ट के आदेश में दखल न दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक मास्टरमांइड था। किसी मामले में एक से ज्यादा मास्टरमांइड नहीं हो सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 जून को दिए अपने आदेश में 33 साल से जेल में बंद राशिद खान की रिहाई का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने जेल में उसके लंबे वक्त और उसके व्यवहार के मद्देनजर यह रियायत देने का फैसला किया था।

हाईकोर्ट के फैसले को लेकर बंगाल सरकार का कहना है कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की राय राशिद खान की रिहाई के खिलाफ थी।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। राज्य सरकार की ओर कहा गया कि आतंकवाद जैसे जघन्य अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति को समय से पहले रिहा करना पीड़ितों और उनके स्वजन के साथ अन्याय होगा।

राशिद खान की ओर से अपनी याचिका में कहा गया था कि इसी मामले के दोषी पन्नालाल जायसूरा को वर्ष 2014 में समयपूर्व रिहा कर दिया गया था।

16 मार्च 1993 की रात को कोलकाता के बहुबाजार क्षेत्र में भयानक विस्फोट किया गया था। इस हादसे में 69 लोगों की जान चली गई थी और कई बिल्डिंगें ध्वस्त हो गई थीं।

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