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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:50 · नई दिल्ली संस्करण

देश के प्रधानमंत्री संविधान से नहीं, सभ्यतागत परंपरा से ‘हिंदू’ रहेंगे: सरमा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
देश के प्रधानमंत्री संविधान से नहीं, सभ्यतागत परंपरा से ‘हिंदू’ रहेंगे: सरमा

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को देश के शीर्ष नेतृत्व की धार्मिक पहचान को लेकर एक मजबूत राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भले ही संविधान में प्रधानमंत्री बनने को लेकर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन देश की सभ्यतागत परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि यह पद हिंदू के पास ही रहेगा।

मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “भारत का प्रधानमंत्री कोई भी बन सकता है।

संविधान में इसको लेकर कोई रोक नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत मूल रूप से एक हिंदू सभ्यता है और उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री हमेशा इसी सभ्यतागत ढांचे से उभरकर आएगा।

मुख्यमंत्री के ये बयान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के उस वैचारिक रुख को मजबूत करते हैं, जिसमें भारत को केवल एक आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र नहीं, बल्कि प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से निर्मित एक सभ्यतागत राज्य के रूप में देखा जाता है।

इस बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 जनवरी को प्रस्तावित असम दौरे को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई। इस दौरान कालीआबर में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे के दौरान काजीरंगा एलिेवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी जाएगी। करीब 6,957 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) द्वारा लागू किया जाएगा।

आधारशिला रखने के बाद परियोजना की प्रमुख विशेषताओं पर आधारित एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। यह परियोजना एनएच-37 (नया एनएच-715) के कालीआबर–नुमालीगढ़ खंड को चार लेन का बनाने का हिस्सा है।

इसमें लगभग 34.45 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड, वन्यजीव-अनुकूल कॉरिडोर शामिल है, साथ ही जखलाबांधा और बोकाखाट में बाइपास का निर्माण भी किया जाएगा।

यह कॉरिडोर अदालत के निर्देशों और भारतीय वन्यजीव संस्थान की सिफारिशों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, ताकि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, की जैव विविधता की सुरक्षा के साथ-साथ मध्य और ऊपरी असम के बीच संपर्क बेहतर बनाया जा सके। परियोजना को 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा, कार्यक्रम के दौरान दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों, डिब्रूगढ़ से गोमती नगर (लखनऊ) और कामाख्या से रोहतक, को वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाने की भी योजना है, जिससे असम से उत्तर भारत के लिए रेल संपर्क और मजबूत होगा।

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