मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित जालसाजी मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित जालसाजी मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी

नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के मामले में सुनवाई अब 18 अप्रैल को होगी। सोनिया गांधी के खिलाफ बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त किए वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की कथित जालसाजी की शिकायत की गई है। याचिकाकर्ता ने इसकी जांच कराने और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दाखिल रिवीजन पिटीशन पर आज अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बहस पूरी कर दी, लेकिन सोनिया गांधी की तरफ से दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की है।

सुनवाई के दौरान राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कई सवाल पूछे।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला लगभग आधी सदी पुराना है और आप एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। जांच किस स्तर पर और कैसे होगी? कोर्ट ने यह भी पूछा कि आप मामले का दायरा बढ़ा रहे हैं। अदालत ने कहा कि आज आप जो जानकारी दे रहे हैं, वह सिर्फ नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों तक सीमित है।

याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि यह एक विदेशी नागरिक द्वारा की गई गलत घोषणा का मामला है।

उन्होंने अदालत को बताया कि वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में केवल जाली दस्तावेजों या धोखाधड़ी के जरिए ही शामिल किया जा सकता था। वकील ने कहा कि उन्होंने मतदाता सूची की सत्यापित प्रतियां मांगी थीं और उन्हें उपलब्ध भी कराई गई हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रथम दृष्टया गलत घोषणा साबित होती है, इसलिए जाली दस्तावेजों और जालसाजी की जांच होनी चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, लेकिन उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में पहले से शामिल था।

याचिका के अनुसार 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था। जब 1983 में नागरिकता मिली, तब यह सवाल उठाया गया कि 1980 में नाम शामिल कराने के लिए कौन से दस्तावेज पेश किए गए थे और क्या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था।

पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब दाखिल कर याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया था। सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दायर की।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें