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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

वागड़ में हरियाली अमावस्या का उल्लास, रिमझिम फुहारों और मालपुओं की सोंधी खुशबू ने बढ़ाई श्रावण की रंगत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
वागड़ में हरियाली अमावस्या का उल्लास, रिमझिम फुहारों और मालपुओं की सोंधी खुशबू ने बढ़ाई श्रावण की रंगत

बांसवाड़ा।

प्रदेश के अन्य हिस्सों से अलग, बांसवाड़ा और डूंगरपुर यानी वागड़ आंचल में श्रावण मास की शुरुआत एक अनूठी और खास परंपरा के साथ होती है। जहाँ कई इलाकों में सावन पखवाड़ा पहले ही शुरू हो जाता है, वहीं वागड़ में हरियाली अमावस्या से ही श्रावण मास और सालभर के तमाम लोक पर्वों व उत्सवों का श्रीगणेश होता है।

इस पावन पर्व को उत्साहपूर्वक मनाने और जीवन में मिठास घोलने की परंपरा सदियों पुरानी है।

हरियाली अमावस्या के इस खास मौके पर पारंपरिक रूप से मालपुए बनाने और खाने का विशेष महत्व है। शहर की मिठाइयों की दुकानों पर सुबह से ही पारंपरिक और स्वादिष्ट मालपुए बनने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ देर रात तक लगी रहती है। वहीं दूसरी ओर, घरों में शुद्ध देसी घी में तैयार हो रहे मालपुओं की सोंधी खुशबू फिजा में अपनी महक बिखेर रही है।

सावन के इस पावन आगमन पर प्रकृति ने भी अपनी पूरी मेहर बरसा रखी है। सुबह से ही झमाझम बारिश का दौर जारी है, जिससे चारों ओर हरियाली छा गई है।

एक तरफ श्रावण मास का पवित्र महीना, दूसरी तरफ हरियाली अमावस्या का उल्लास, ऊपर से रिमझिम फुहारें और मालपुओं की भीनी-भीनी खुशबू—इन तीनों ने मिलकर पूरे माहौल को भक्ति भाव, उत्साह और उमंग से सराबोर कर

दिया है।

पंडित अनंत जोशी ने बताया कि गुजरात के पास वागड़ बसा होने के कारण श्रावण माह अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष से शुरू होगा। यहां के लोग चंद्रमा की प्रगति को मानते हुए शुक्ल पक्ष को उत्तम मांगते है। चंद्रमा धीरे-धीरे अपनी कलाओं के माध्यम से पूर्णिमा तक पूर्ण होता है। इसी प्रकार जीवन में भी अंधेरा हटकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुजरात संस्कृति की ओर से हर धार्मिक, शुभ कार्य शुक्ल पक्ष से शुरू होते है।

महिला भक्त डिम्पल पटेल ने बताया कि श्रावण मास के दौरान पार्थिव शिवलिंग बना कर जिलेभर के विभिन्न शिवालयों में रोजाना आकर्षक श्रृंगार होता है और रात में महा आरती होती है।

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