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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:07 · नई दिल्ली संस्करण

राज्यसभा में उठा हानिकारक कफ सिरप व घटिया दवाओं का मुद्दा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
राज्यसभा में उठा हानिकारक कफ सिरप व घटिया दवाओं का मुद्दा

नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को खाद्य-मिलावट, निम्न गुणवत्ता वाली दवाइयों तथा हानिकारक कफ-सिरप के मुद्दा उठाया गया। इस दौरान सरकार से इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई। राज्यसभा में यह विषय शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाया।

उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में खाद्य-मिलावट, निम्न गुणवत्ता वाली दवाइयों तथा दूषित कफ-सिरप के मुद्दे को सदन के समक्ष रखा। उन्होंने सरकार से इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। शून्यकाल में विशेष उल्लेख करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश के बाजारों में मिलावटी खाद्य पदार्थों और घटिया दवाइयों की उपलब्धता एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

उन्होंने बताया कि डॉक्टरों द्वारा लिखे जा रहे कई कफ-सिरप दूषित पाए गए हैं, जिनके सेवन से शिशुओं की मौत तक हुई है। सांसद ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भी लिखा है। दूषित कफ-सिरप से लेकर बाजार में खुलेआम बिक रही कम गुणवत्ता वाली दवाइयां और मिलावटी खाद्य पदार्थ, इन सभी पर तुरंत नियंत्रण जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मिलावटी खाद्य भी बेहद खतरनाक व हानिकारक है और यह कैंसर जैसे गंभीर रोग का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि मिलावट का यह कारोबार बेहद खतरनाक है और यह हर परिवार के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है।

उन्होंने एफएसएसएआई की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि रैंडम एफएसएसएआई रेड तो सुर्खियों में आ जाती हैं, लेकिन जमीन पर उसके परिणाम दिखाई नहीं देते। राज्यसभा सांसद ने नियम तोड़ने वालों पर कठोर दंड और सख्त प्रवर्तन की जरूरत की बात कही। प्रियंका चतुर्वेदी ने सदन से आग्रह किया कि सरकार ऐसी मिलावट और घटिया दवाइयों पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक अभियान, सख्त दंडात्मक कार्रवाई, और नियमित बाजार-निगरानी लागू करे, ताकि नागरिकों की सेहत सुरक्षित रह सके।

वहीं शून्य काल के दौरान ही कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने बैंकों का मुद्दा सदन के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि किसी बैंक के डूब जाने पर खाताधारक को अधिकतम 5 लाख रुपए का बीमा कवर मिलता है। उन्होंने इसे अपर्याप्त बताया। डांगी ने सदन में कहा कि बैंकों में जिन लोगों के पांच लाख रुपए से अधिक जमा है उनमें अधिकांश बुजुर्ग व्यक्ति हैं।

कई बुजुर्गों के 5 लाख से अधिक रुपए बैंकों में जमा होते हैं जिनके माध्यम से वे अपनी गुजर बसर करते हैं, ऐसे में यदि कोई बैंक डूब जाता है तो केवल 5, लाख रुपये तक लौटाने की व्यवस्था है।

उन्होंने बैंक की इस इंश्योरेंस गारंटी को 25 लाख रुपए तक किए जाने के बात सदन के समक्ष रखी। डांगी ने कहा कि पांच लाख रुपए का इंश्योरेंस बढ़ाकर कम से कम 25 लाख रुपए किया जाना चाहिए। इसका सबसे अधिक लाभ बुजुर्ग व्यक्तियों को मिल सकेगा।

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