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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:26 · नई दिल्ली संस्करण

कालकाजी और नंद नगरी मस्जिद अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट की फटकार, कहा- 'अदालत के प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करें'

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कालकाजी और नंद नगरी मस्जिद अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट की फटकार, कहा- 'अदालत के प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करें'

नई दिल्ली। साउथ दिल्ली के कालकाजी इलाके में जामा मस्जिद और नंद नगरी स्थित मस्जिद को 'सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट 21 जनवरी को सुनवाई करेगा।

इस मामले में हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की, लेकिन न कोई आदेश पारित नहीं किया और न ही कोई नोटिस।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप हर दूसरे दिन ऐसी याचिका दाखिल कर रहे हैं। कोर्ट के प्लेटफार्म का ऐसा गलत इस्तेमाल न करें।

हाईकोर्ट ने कहा कि आपको समाज में सिर्फ अतिक्रमण के रूप में एक ही दिक्कत नजर आती है। इसके अलावा आपको समाज में कोई दूसरी समस्या नजर नहीं आती। पीने के पानी जैसी तमाम दिक्कतें हैं, उनको लेकर आप कोर्ट नहीं आते हैं। हमें कोर्ट के प्लेटफार्म के ऐसे गलत इस्तेमाल को रोकना होगा।

बता दें कि प्रीत सिंह सिरोही नाम के एक याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि मस्जिद का लगभग एक हजार वर्ग मीटर हिस्सा सड़क और फुटपाथ पर कब्जा करके बनाया गया है और यह निर्माण न केवल अवैध है, बल्कि सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण भी है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मस्जिद और मदरसे को अवैध घोषित करने और उन्हें गिराने का आदेश देने की गुजारिश की थी।

प्रीत सिंह सिरोही के मुताबिक, बहापुर गांव में जमीन 1960 में सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित की गई थी और बाद में 1963 में दिल्ली विकास प्राधिकरण को ट्रांसफर कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जिस जमीन पर जामा मस्जिद और मदरसा बना है, वह इसी अधिग्रहित जमीन का हिस्सा है। जमीन की वास्तविक स्थिति साफ करने के लिए डीडीए और लोक निर्माण विभाग में भी शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि जामा मस्जिद और मदरसा मिल्लत उल इस्लाम की जमीन की जांच कराई जाए। अगर निर्माण अवैध पाया जाता है तो उसे हटाने की कार्रवाई की जाए।

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