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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

श्रद्धा, आस्था और रहस्य से भरा है बोरेश्वर महादेव मंदिर; रात में दर्शन के लिए आते हैं नंदी महाराज!

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
श्रद्धा, आस्था और रहस्य से भरा है बोरेश्वर महादेव मंदिर; रात में दर्शन के लिए आते हैं नंदी महाराज!

नई दिल्ली। उज्जैन और काशी को बाबा महाकाल की धरती के रूप में पूजा जाता है, जहां हर मंदिर से कोई न कोई धार्मिक महत्व जरूर जुड़ा है।

उज्जैन की धरती पर बाबा महाकाल के अलावा, भगवान शिव का एक अन्य अद्भुत रूप मौजूद है, जहां सिर्फ दर्शन मात्र से 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का फल मिलता है। यही कारण है कि भक्त उज्जैन के रहस्यमयी मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं।

उज्जैन जिले के दंगवाड़ा गांव में बोरेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो बाकी शिव मंदिरों से काफी अलग है।

हर मंदिर में जहां भोलेनाथ 'शिवलिंग' के रूप में विराजमान हैं, वहीं बोरेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव 'बोर' के आकार की आकृति में स्थापित हैं। ये देखने में बेलन की तरह लंबा और गोल लगता है। शिवलिंग जमीन के ऊपर की तरफ नहीं बल्कि नीचे की तरफ धंसे हुए हैं। यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक धरोहर है, जिसकी जड़ें ताम्र पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक फैली हुई मानी जाती हैं।

मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जलाधारी है, जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए, उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है। हमेशा समान बना रहता है। मान्यता है कि यहां 12 ज्योतिर्लिंगों का समावेश है। माना जाता है कि मंदिर में रात के समय चमत्कार होते हैं, जैसे रात्रि में नंदी महाराज मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं और मंदिर की घंटियां भी खुद-ब-खुद बजने लगती हैं।

यही कारण है कि भक्तों के लिए यह मंदिर श्रद्धा, आस्था और रहस्य का केंद्र है।

मंदिर के पास से चंबल नदी भी गुजरती है, जो शिवलिंग की आधी परिक्रमा करती है। नदी भी भगवान शिव के सोमसूत्र का पालन करती है और आधी परिक्रमा ही करती है।

महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ आती है क्योंकि महाशिवरात्रि पर बोरेश्वर महादेव का विशेष शृंगार होता है और बाबा की सवारी भी निकलती है, जो नगर में चक्कर लगाकर वापस मंदिर में आती है। माना जाता है कि महादेव स्वयं भक्तों को नगर में आशीर्वाद देते हैं। वहीं सावन के महीने में हर सोमवार को बाबा की सवारी निकलती है। इस विशेष सवारी का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।

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