दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग मामलों में लापता/अपहृत नाबालिग बच्चों को सफलतापूर्वक तलाश कर उनके परिजनों से मिला दिया है।

नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025 — दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग मामलों में लापता/अपहृत नाबालिग बच्चों को सफलतापूर्वक तलाश कर उनके परिजनों से मिला दिया है। दोनों ही मामले बेहद संवेदनशील थे क्योंकि दोनों पीड़ित बच्चे महज 14 वर्ष के थे और लंबे समय से गायब थे। पुलिस टीम की सतर्कता, कड़ी मेहनत और तकनीकी सूझबूझ से बच्चों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिवार को राहत पहुंचाई गई।
पहला मामला: 14 वर्षीय लड़का
पहला मामला शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र (आउटर नॉर्थ जिला) से सामने आया, जहां एक 14 वर्षीय लड़का 20 जून 2025 से लापता था। इस संबंध में धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की AHTU टीम, जिसमें इंस्पेक्टर मनोज दहिया, एएसआई गोपाल कृष्ण, कांस्टेबल धर्मराज और महिला कांस्टेबल मिंटू शामिल थे, ने ACP/AHTU के नेतृत्व में जांच शुरू की।
बच्चे के माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ की गई। तकनीकी निगरानी और मैनुअल इनपुट्स के आधार पर लड़के को पुल प्रहलादपुर इलाके से बरामद किया गया। जांच में पता चला कि वह छठवीं कक्षा का स्कूल ड्रॉपआउट है और 20 जून को अपनी मां से झगड़े के बाद गुस्से में घर छोड़कर चला गया था। पुलिस ने उसे पूरी सुरक्षा के साथ संबंधित थाने को सौंप दिया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दूसरा मामला: 14 वर्षीय लड़की
दूसरे मामले में रणहौला थाना क्षेत्र से एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की 24 अप्रैल 2025 से लापता थी। इस पर भी धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज था। AHTU की यही टीम, जिसने पहले मामले में सफलता हासिल की थी, ने इस केस को भी गंभीरता से लिया और बच्ची की तलाश शुरू की।
पीड़िता के माता-पिता, पड़ोसियों और अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाई गई। मैनुअल इनपुट्स के आधार पर लड़की को मोहन गार्डन, उत्तम नगर इलाके से बरामद किया गया। पूछताछ में सामने आया कि वह नवमी कक्षा की छात्रा है, जिसके पिता ई-रिक्शा चालक और मां एक फैक्ट्री में काम करती हैं। 24 अप्रैल को मां से कहासुनी के बाद उसने घर छोड़ दिया और ट्रेन से भोपाल, कानपुर होते हुए भागलपुर (बिहार) पहुंच गई, जहां वह अपने रिश्तेदारों के यहां रुकी हुई थी। उसे सुरक्षित बरामद कर थाने के जांच अधिकारी को सौंप दिया गया है।
संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का परिचायक
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की ISO 9001:2015 प्रमाणित AHTU टीम ने इन दोनों मामलों में जिस संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण से कार्य किया, वह प्रशंसनीय है। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दिल्ली पुलिस अपने नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।





