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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:40 · नई दिल्ली संस्करण

टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया सरकार का फैसला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया सरकार का फैसला

नई दिल्ली। नीट री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर सरकार के अस्थायी बैन के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अस्थायी बैन के खिलाफ दायर टेलीग्राम की याचिका को भी खारिज कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर अपना फैसला दिया। जस्टिस तेजस करिया ने कहा, "सरकार का आदेश सही है। आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।

सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों से जुड़े मामलों की आशंका के चलते टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया है। चिंताएं थीं कि नीट-यूजी विवाद में शामिल संगठित नकल करने वाले नेटवर्क इसका इस्तेमाल कर रहे थे।

बड़े पैमाने पर पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद मूल नीट परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार ने इस पर बैन का फैसला लिया। साथ ही, 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा भी बंद करने का आदेश दिया गया।

ये पाबंदियां नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत जारी निर्देशों के आधार पर लगाई गई थीं।

हालांकि, टेलीग्राम ने सरकार के फैसले का विरोध किया और इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून इस तरह के भेद का प्रावधान नहीं करता। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी।

केंद्र सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि टेलीग्राम के आर्किटेक्चर और परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में इसके बार-बार गलत इस्तेमाल के कारण अधिकारियों के पास इमरजेंसी ब्लॉकिंग शक्तियों का इस्तेमाल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।

एक हलफनामे में केंद्र ने कहा, "यह फैसला दूसरे सभी विकल्पों को आजमाने के बाद ही लिया गया, जिसमें गैर-कानूनी कंटेंट को खास तौर पर हटाने के बार-बार किए गए अनुरोध भी शामिल थे, जो नाकाफी पाए गए।"

दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी।

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