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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:55 · नई दिल्ली संस्करण

बलूचिस्तान में शिक्षकों को जबरन किया जा रहा रिटायर, छात्र संगठनों ने जताई आपत्ति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बलूचिस्तान में शिक्षकों को जबरन किया जा रहा रिटायर, छात्र संगठनों ने जताई आपत्ति

क्वेटा। एक प्रमुख छात्र संगठन ने पाकिस्तान में शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति और उनके खिलाफ की जा रही प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे "अलोकतांत्रिक और दुर्भाग्यपूर्ण" बताया है।

बलोच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि जबरन सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया का इस्तेमाल उन शिक्षकों और कर्मचारियों को डराने के लिए किया जा रहा है, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं।

छात्र संगठन के अनुसार, ये कदम एक “साजिश” का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान को शिक्षा के मामले में पिछड़ा रखना और वहां की साक्षरता दर को और कम करना है। संगठन ने कहा कि पूरे प्रांत में शिक्षकों की भारी कमी के कारण कई स्कूल पहले ही बंद हो चुके हैं, जिन्हें अक्सर “गोस्ट स्कूल” (स्कूल तो है लेकिन पढ़ाने और पढ़ने वाले नहीं) कहा जाता है।

बीएसएसी ने कहा, "बलूचिस्तान में लंबे समय से शिक्षा की स्थिति दयनीय बनी हुई है। हर सरकार शिक्षा सुधार के दावे करती है, लेकिन वास्तविकता में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। संगठन ने कहा कि कई क्षेत्रों में न तो शिक्षक हैं, न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, और कई जगहों पर स्कूल ही मौजूद नहीं हैं।

संगठन ने इसे प्रांत की “शैक्षिक पिछड़ेपन” की पीड़ादायक तस्वीर बताया और कहा कि इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

बीएसएसी ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में सरकारी कर्मचारी (जिनमें कई प्रोफेसर और शिक्षक शामिल हैं) अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करते हुए भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के दावे करती है, लेकिन इन शिक्षकों की जायज मांगों पर कोई ध्यान नहीं देती।

शिक्षकों की जबरन सेवानिवृत्ति की आलोचना करते हुए बीएसएसी ने कहा, “शिक्षक किसी भी समाज की प्रगति का अनिवार्य हिस्सा होते हैं। वही शिक्षा क्रांति की बुनियाद रखते हैं। इस तरह उनका अपमान स्वीकार्य नहीं है।

हमारा शिक्षकों के साथ संबंध बौद्धिक और आत्मिक है; उनकी मेहनत और ईमानदारी छात्रों को सफलता की ऊंचाई तक पहुंचाती है।”

छात्र संगठन ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि वह बलूचिस्तान में अपनी “शिक्षा-विरोधी नीति” पर पुनर्विचार करे और शिक्षकों तथा अन्य सरकारी कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को तुरंत रोके।

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