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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:55 · नई दिल्ली संस्करण

'रमन' को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, केयरटेकर पर अवमानना की कार्रवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
'रमन' को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, केयरटेकर पर अवमानना की कार्रवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बंदी हाथी 'रमन' की देखभाल कर रहे केरल निवासी कृष्णनकुट्टी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए केरल सरकार को निर्देश दिया है कि वह हाथी की अस्थायी अभिरक्षा अपने हाथ में ले और उसे किसी उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखा जाए। अदालत ने कृष्णनकुट्टी पर 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने कहा कि कृष्णनकुट्टी ने अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिए गए उस आश्वासन का जानबूझकर उल्लंघन किया, जिसमें कहा गया था कि स्वामित्व विवाद लंबित रहने तक हाथी 'रमन' का इस्तेमाल किसी भी व्यावसायिक या मंदिर संबंधी गतिविधि में नहीं किया जाएगा।

यह विवाद हाथी 'रमन' की अभिरक्षा और स्वामित्व को लेकर है। याचिकाकर्ता जयकृष्ण मेनन का दावा है कि यह हाथी माता अमृतानंदमयी मठ का है और केवल देखभाल के लिए अस्थायी रूप से कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि अदालत के आदेश के बावजूद 'रमन' का इस्तेमाल मंदिर उत्सवों, धार्मिक जुलूसों और अन्य व्यावसायिक आयोजनों में किया गया। इसके समर्थन में तस्वीरें, पोस्टर, सोशल मीडिया पोस्ट और प्रचार सामग्री भी अदालत के समक्ष पेश की गई।

हालांकि कृष्णनकुट्टी ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि एक अवसर पर दूसरे हाथी की अनुपस्थिति के कारण 'रमन' को मंदिर समारोह में ले जाया गया था। उन्होंने अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी।

सुनवाई के दौरान केरल सरकार की रिपोर्ट में सामने आया कि 3 फरवरी 2026 को 'रमन' को चावक्काड स्थित एक मंदिर उत्सव में ले जाया गया था, जहां बाद में उसका पशु चिकित्सा परीक्षण भी किया गया। अदालत ने कृष्णनकुट्टी के लिखित बयान का भी संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि 'रमन' ने 'मस्त' अवधि समाप्त होने के बाद एक मंदिर अनुष्ठान में भाग लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि हाथी 'रमन' को अदालत में दिए गए आश्वासन के बावजूद धार्मिक जुलूसों और अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि केरल के सबसे ऊंचे हाथियों में गिने जाने वाले 'रमन' का इस तरह व्यावसायिक उपयोग किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पीठ ने कहा, "यदि हम ऐसे उल्लंघन पर आंखें मूंद लें तो यह मूक जीवों के प्रति अपने कर्तव्य से विमुख होना होगा। विशेषकर उन जानवरों के मामले में, जिनकी भलाई भी सर्वोपरि है।"

अदालत ने अंतिम फैसला आने तक केरल सरकार को 'रमन' की अभिरक्षा लेने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत उसकी देखभाल अपने खर्च पर करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी और स्वामित्व विवाद के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णनकुट्टी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की, जबकि राज्य सरकार के अधिकारियों को अवमानना मामले से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य अधिकारियों की ओर से आदेश की जानबूझकर अवहेलना का कोई प्रमाण नहीं मिला।

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