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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:24 · नई दिल्ली संस्करण

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब सोमवार और शुक्रवार को होगी वर्चुअल सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब सोमवार और शुक्रवार को होगी वर्चुअल सुनवाई

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभावों के मद्देनजर ईंधन बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, अन्य तीन दिन हाइब्रिड सुनवाई होगी।

मौजूदा हालात को देखते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने यह फैसला लिया है।

अभी तक सुप्रीम कोर्ट में हाइब्रिड सुनवाई की व्यवस्था थी, पेशी व्यक्तिगत तौर पर और वर्चुअल दोनों तरीके से हो रही थी। वहीं, कारपूलिंग करने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के जज सहमत हो गए हैं।

जारी सर्कुलर में सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर की ओर से कहा गया है कि अब सुप्रीम कोर्ट में 'मिसलेनियस डेज' (जैसे सोमवार, शुक्रवार) और आंशिक कार्य दिवसों पर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।

रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वीडियो लिंक समय पर भेजे जाएं और तकनीकी व्यवस्था सुचारू रखी जाए ताकि न्यायालय के कामकाज में कोई बाधा न आए।

ईंधन के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से अपने बीच कारपूलिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया है।

न्यायालय ने प्रत्येक रजिस्ट्री शाखा या अनुभाग में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन तक घर से काम करने की अनुमति दी है, बशर्ते साप्ताहिक रोस्टर तैयार किया जाए और न्यायालय का निर्बाध कामकाज सुनिश्चित किया जाए।

संबंधित रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करेंगे कि सप्ताह शुरू होने से पहले साप्ताहिक कार्यसूची तैयार कर ली जाए। घर से काम करने की अनुमति प्राप्त कर्मचारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे टेलीफोन पर उपलब्ध रहें और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय कार्यालय आने के लिए तैयार रहें।

संबंधित अधिकारी उन्हें सौंपे गए विभिन्न कार्यों को समय पर पूरा करना भी सुनिश्चित करेंगे।

यदि किसी शाखा या अनुभाग में कार्य की अनिवार्य प्रकृति पर विचार करने के बाद संबंधित रजिस्ट्रार की राय है कि घर से काम करने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो रजिस्ट्रार उस शाखा या अनुभाग के लिए ऐसी व्यवस्था को प्रतिबंधित या संशोधित कर सकते हैैं।

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