पटना हाईकोर्ट के 7 जजों का जीपीएफ खाता बंद करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
पटना हाईकोर्ट के 7 जजों का जीपीएफ खाता बंद करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
नई दिल्ली, 24 फरवरी । सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के सात जजों का जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) खाता बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और बिहार सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 3 मार्च को करने का आदेश दिया।
दरअसल, पटना हाईकोर्ट के इन जजों को अप्रैल 2010 में बिहार की उच्च न्यायिक सेवाओं के तहत सीधी भर्ती के रूप में अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। उस समय से ही वे सभी राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) का हिस्सा रहे हैं। पटना हाईकोर्ट के सात जजों ने याचिका दायर कर कहा है कि उनके जीपीएफ खाते बिहार सरकार ने बंद कर दिए हैं। इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ पर अनिश्चितता हो गई है।
बिहार सरकार ने 2016 में एक नीति बनाई कि नई पेंशन योजना से पुरानी पेंशन योजना में जाने वाले लोग अपने एनपीएस योगदान की राशि वापस पाने के हकदार होंगे। उस राशि को बैंक खाते में रखा जा सकता है या फिर जीपीएफ खाते में भी जमा किया जा सकता है। 2022 में जब हाईकोर्ट के सात जज नियुक्त हुए, तो इन सभी को जीपीएफ खाता भी दिया गया, जिसमें एनपीएस योगदान राशि जमा कराई। नवंबर, 2022 में इन जजों के एनपीएस योगदान को जीपीएफ में ट्रांसफर करने की वैधता के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जिस पर मंत्रालय की राय आने के बाद इन जजों के जीपीएफ खाते बंद कर दिए गए। जीपीएफ खातों को बंद करने के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।





